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हरकतें तो पाकिस्तान जैसी हैं, कनाडा क्या सच में भारत की चिंताओं पर गंभीर है?

कनाडा में भारत के खिलाफ बढ़ती नफरती सोच, अलगाववादियों का अड्डा बनना और अब सरकार के स्तर पर खुलकर तनातनी दोनों देशों के संबंधों को कमजोर करने लगी हैं। आज के समय में कोई भी देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, सबसे बड़े मार्केट और बेस्ट माइंड्स के सोर्स देश से संबंध बिगाड़ना नहीं चाहेगा। हालांकि कनाडा का केस कुछ अलग है। खालिस्तानियों को संरक्षण वहां कई दशकों से मिल रहा है लेकिन जिस तरह से कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने सहयोगी देश पर उंगली उठाई, उसने भारत की चिंताएं बढ़ा दीं। पहले बिना सबूत आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ होने की बात करना फिर खालिस्तानियों को भारत के खिलाफ अनाप-शनाप प्रॉपगेंडा फैलाने की छूट मिलना, ये किसी भी संप्रभु देश के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। हाल में भारत ने अमेरिका के साथ ‘टू प्लस टू’ बातचीत में भी यह मुद्दा उठाया और अपनी चिंताएं सामने रखीं। कनाडा भारत के लिए ‘दूसरा पाकिस्तान’ बनने की राह पर है। जिस तरह से पड़ोसी पाकिस्तान में हाफिज सईद जैसे दर्जनों की संख्या में आतंकी धर्म और कट्टरपंथ की घुट्टी पिलाते हुए भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं, उसी तरह कनाडा में खालिस्तानियों को खुली छूट मिल गई है। वहां ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर ट्रूडो सरकार ने खालिस्तानियों को ग्रीन सिग्नल दे रखा है।

कनाडा में पल रहा पन्नू
भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने हाल में कहा कि हमारी मुख्य चिंता सुरक्षा को लेकर है। पन्नू (खालिस्तानी आतंकी) का हाल में एक वीडियो सामने आया है, जो भारतीय हितों के लिए बहुत ही गंभीर सुरक्षा चिंता पैदा करता है। प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने वीडियो में 19 नवंबर को एयर इंडिया की उड़ानों के यात्रियों को धमकी दी है। इसी दिन अहमदाबाद में क्रिकेट विश्वकप फाइनल होना है। वैश्विक मंचों पर जब भारत ने खुलकर कनाडा की पोल खोलनी शुरू की तो प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सुर बदले लेकिन किया अब भी कुछ नहीं।

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