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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दी जमानत.

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अनंतनाग में बैंक प्रबंधक के कथित अपहरण से जुड़े एक मामले में चार आरोपियों को जमानत दे दी है।

कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए न्यायशास्त्र के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को दोहराया कि “जमानत एक नियम है और इसे खारिज करना एक अपवाद है।” यह टिप्पणी बताती है कि न्यायालय ने स्वतंत्रता के अधिकार को प्राथमिकता दी है, बशर्ते आरोपी न्याय की प्रक्रिया में सहयोग करें।

हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले में आगे की न्यायिक हिरासत की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सभी चार आरोपी पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। ये चारों आरोपी दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कंगनहॉल गाँव के निवासी हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि लंबी हिरासत के बजाय, सुनवाई के दौरान उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें लगाना पर्याप्त होगा। इस निर्णय से इन चारों आरोपियों को जेल से बाहर आने का मौका मिलेगा।

न्यायालय ने जमानत देते हुए कुछ कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि आरोपी जांच में बाधा नहीं डालेंगे और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को तब तक छीना नहीं जा सकता जब तक कि यह साबित न हो जाए कि आरोपी के भागने या न्याय में बाधा डालने का गंभीर खतरे हैं। इस आदेश से स्थानीय न्यायिक हलकों में जमानत के नियम पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।

 

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