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राजस्थान के मेनार गांव में मनाई जाएगी 500 साल पुरानी ‘गनपाउडर होली’
राजस्थान: वीरभूमि राजस्थान का मेनार गांव एक खास परंपरा के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
यहां हर साल ‘गनपाउडर होली’ मनाई जाती है, जो 500 साल पुरानी परंपरा है।
‘गनपाउडर होली’ का इतिहास
- मेनार गांव में यह होली मुगलों के खिलाफ विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।
- इस परंपरा के पीछे की कहानी के अनुसार, ग्रामीणों ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष कर जीत हासिल की थी।
- उस जीत की खुशी में यहां ‘गनपाउडर होली’ की शुरुआत हुई।
- यह होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि साहस और वीरता की मिसाल मानी जाती है।
- इस अनोखी होली को देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी यहां पहुंचते हैं।
कैसे खेली जाती है ‘गनपाउडर होली’?
- इस अनोखी होली में गनपाउडर का इस्तेमाल कर धमाके किए जाते हैं।
- गांववाले अपने घरों की छतों से गनपाउडर से भरे पटाखे जलाते हैं।
- धमाकों के बीच लोग पारंपरिक गीतों पर नृत्य करते हैं और एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।
- गांव में इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।
- स्थानीय लोग इसे अपने पूर्वजों की वीरता का प्रतीक मानते हैं।
सुरक्षा के विशेष इंतजाम
- इस परंपरा में सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है।
- स्थानीय प्रशासन फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम की तैनाती करता है।
- गनपाउडर का सीमित मात्रा में ही प्रयोग किया जाता है ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।
- ग्रामीण इसे परंपरा का हिस्सा मानकर सावधानीपूर्वक इसका आयोजन करते हैं।
- इस उत्सव में भाग लेने वाले पर्यटकों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा जाता है।
पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
- मेनार गांव में ‘गनपाउडर होली’ एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है।
- इस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं।
- होली के इस अनोखे रूप ने राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को और खास बना दिया है।
- इस परंपरा के जरिए गांववाले अपनी वीरता और एकता को दर्शाते हैं।
- ‘गनपाउडर होली’ राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।


