राज्य सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
यह फैसला मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर लिया गया है। उच्च न्यायालय ने शहर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की थी और सरकार को इस पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
समिति का काम क्या होगा?
यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि मुंबई महानगर क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाना कितना व्यवहार्य है। समिति यह भी सुझाव देगी कि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
यह फैसला क्यों लिया गया?
मुंबई में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिसके कारण शहर में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है और कई बीमारियां भी फैल रही हैं। इसीलिए सरकार ने प्रदूषण को कम करने के लिए यह कदम उठाया है।
इस फैसले का क्या असर होगा?
अगर इस समिति की सिफारिशें मान ली जाती हैं तो मुंबई में पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लग सकता है। इससे शहर में प्रदूषण का स्तर कम होगा और लोगों की सेहत में सुधार होगा। लेकिन इस फैसले से लोगों के जीवनशैली पर भी असर पड़ेगा क्योंकि उन्हें अपने वाहन बदलने होंगे।


