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क्यों इतने आतंकपरस्त हो गए जस्टिन ट्रूडो? कनाडा के पत्रकार ने ही खोल दी पूरी पोल

नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बीजिंग की तरफ से बाधित करने के खिलाफ, लोकतांत्रिक देशों के वैश्विक गठबंधन के भीतर भारत को शामिल करने के अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयास को एक कड़ा झटका लगा है। कनाडा की इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटिजी, ओटावा की चमकदार नई व्यापार और विदेश नीति पहल दम तोड़ चुकी है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि कनाडा के सुरक्षित ठिकानों से सबसे खतरनाक खालिस्तानियों को इतना ज्यादा प्रोत्साहित किया गया है।

12 साल से चल रही कनाडा-भारत के बीच मुक्त व्यापार वार्ता रहस्यमय तरीके से ‘रोक दी गई’ थी, और अब किसी को इस बात का अंदाजा नहीं है कि दोनों देश फिर कब यह बातचीत शुरू करेंगे या करेंगे भी कि नहीं। हर साल 80 हजार से ज्यादा कनाडाई भारत का दौरा करते हैं, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने अब कनाडा में अनिश्चित काल के लिए वीजा जारी करना पूरी तरह बंद कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक अभूतपूर्व ट्रैवल एडवाइजरी जारी की, जिसमें कनाडा की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों से बहुत सावधान रहने का आग्रह किया गया। इसमें कहा गया है, ‘कनाडा में बिगड़ते सुरक्षा माहौल को देखते हुए, विशेष रूप से भारतीय छात्रों को अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।’

उधर, कनाडाई सरकार ने भारत के इस दावे को खारिज कर दिया है कि कनाडा में हिंदुओं को खतरा है। कनाडा के आव्रजन मंत्री मार्क मिलर ने कहा, ‘कनाडा रूल ऑफ लॉ से चलता है और यह भले ही दुनिया का सबसे सुरक्षित देश नहीं हो, लेकिन हर पैमाने पर दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक जरूर है। इसलिए, मुझे लगता है कि लोगों को भारत के बयान को ध्यान से पढ़ना चाहिए।’

लेकिन शुक्रवार को कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने एक अलर्ट जारी किया। मंत्रालय ने कहा, ‘एक ऑनलाइन वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें हिंदू कनाडाई लोगों को कनाडा छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। यह वीडियो आपत्तिजनक और घृणित है। यह सभी कनाडाई लोगों और हमारे मूल्यों का अपमान है। हम सभी कनाडाई नागरिकों से एक-दूसरे का सम्मान करने और कानून का पालन करने का आग्रह करते हैं। कनाडाई नागरिक अपने समुदायों में सुरक्षित महसूस करने के हकदार हैं।’ यह वीडियो सिख फॉर जस्टिस (SFJ) समूह ने बनाया है। इस समूह के प्रवक्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू ने वीडियो में कहा है कि कनाडा में रहने वाले हिंदुओं को कनाडा छोड़कर भारत जाना चाहिए।

पन्नू ने सबसे पहले यह आरोप लगाया था कि 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गुरु नानक मंदिर के बाहर एसएफजे के प्रमुख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारतीय एजेंट थे। यही आरोप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को कनाडा की संसद में लगाया। ट्रूडो ने कहा कि कनाडा की संप्रभुता और कनाडाई नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आरोप को ‘बेतुका’ और ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया है। कनाडा में ट्रूडो की सरकार की लोकप्रियता लगातार कम हो रही है और ट्रूडो की अल्पसंख्यक सरकार जगमीत सिंह की नई डेमोक्रेटिक पार्टी पर निर्भर है। सिंह लंबे समय से खालिस्तानी साजिश के सिद्धांतों से जुड़े रहे हैं। ट्रूडो पिछले कुछ महीनों से कनाडा में बीजिंग के प्रभाव वाले एजेंटों के साथ अपने करीबी संबंधों के कारण भी जांच के दायरे में हैं। इन एजेंटों ने 2019 और 2021 के संघीय चुनावों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। लेकिन अब इन आरोपों से ध्यान हट गया है और इसके बजाय कथित भारतीय सरकारी ‘हत्यारों’ पर चर्चा हो रही है।

अभी यह कहना मुश्किल है कि कनाडा के सहयोगी देश ट्रूडो के आरोपों को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। भारत और कनाडा ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है और कुछ नाटो देशों ने चिंता व्यक्त की है। लेकिन यह 2018 में रूस के खिलाफ ब्रिटेन के समर्थन जैसा मामला नहीं है। उस समय रूस पर आरोप लगाया गया था कि उसने इंग्लैंड में रूसी सरकार से असंतुष्ट सर्गेई स्क्रिपाल की हत्या करने की कोशिश की थी। तब अमेरिका और 30 यूरोपीय देशों ने 100 से अधिक रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।

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