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नीतीश के राजगीर जाते ही 2017 में हुआ था बड़ा खेला, अब पहुंचे लालू यादव! बिहार की सियासी फिजा में बढ़ी हलचल

नीतीश कुमार का हाव-भाव इन दिनों बदला हुआ है। उनके बारे में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कोई विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A से उनकी नाराजगी की बात बता रहा, जिसके लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया। पीएम पद की दावेदारी छोड़ी, कई विपक्षी नेताओं को विपक्षी एकता के लिए राजी करने उनके शहर गए और विपक्ष के 15 दलों को जुटाया भी। चर्चा होती रही कि नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के संयोजक की भूमिका निभाएंगे। भूमिका तो उनकी वही रही, लेकिन संयोजक अब तक नहीं बन पाए। आगे भी उम्मीद नहीं है। इसलिए कि अब विपक्षी एकता की धुरी कांग्रेस बन गई है।

नीतीश के बारे में तरह-तरह की चर्चा

इसी बीच दिल्ली में G-20 समिट हुआ। भाग लेने कई देशों राष्ट्राध्यक्ष आए थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर भोज दिया। भोज में कांग्रेस के किसी बड़े नेता को नहीं पूछा गया। हां, मुख्यमंत्रियों को जरूर न्योता भेजा गया। विपक्षी मुख्यमंत्रियों में जिन तीन लोगों ने भोज में शिरकत की, उनमें बिहार के सीएम नीतीश कुमार, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू के नाम उल्लेखनीय रहे। नीतीश कुमार को लेकर लोगों को अचरज भी हुआ, क्योंकि लंबे समय से वे लगातार पीएम नरेंद्र मोदी के साथ किसी कार्यक्रम में शिरकत करने से कतराते रहे थे। मोदी हटाओ मुहिम में भी नीतीश बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारे में चर्चा का बाजार गर्म हो गया कि नीतीश पांचवीं बार पाला बदलने की तैयारी में हैं।

शाह और नीतीश का ट्यून एक

सियासी पंडित अलग-अलग एंगल से इसका विश्लेषण करने लगे। अधिकतर यही मानने लगे हैं कि नीतीश कुमार जल्द ही विपक्ष का बाय बोल सकते हैं। इस बीच नीतीश ने सक्रियता भी बढ़ा दी है। कभी वे अचानक सचिवालय पहुंच जाते हैं। कभी जेडीयू दफ्तर बिना बताए हाजिरी लगा देते हैं तो राह से गुजरते अपनी पार्टी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह या मंत्री विजय चौधरी से मिलने उनके घर पहुंच जाते हैं। राबड़ी देवी के आवास जाने के लिए तो वे पैदल ही निकल जाते हैं। उनकी बातचीत का अंदाज भी बदल गया है। जब कहीं से कोई चर्चा नहीं थी तो नीतीश ने अपने अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने का निर्देश देते हुए कह दिया कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं। हालांकि बाद में अमित शाह ने भी यही बात दोहराई कि बिहार में समय से पहले चुनाव हो सकता है।

अंतरात्मा जगाने तो नहीं गए हैं लालू!

खैर, रविवार को ऐसा ही एक औचक दौरा नीतीश कुमार ने किया। जेडीयू दफ्तर से निकलते ही उनकी गाड़ी राबड़ी देवी के आवास की ओर मुड़ गई। शायद वे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिलने गए थे। पर, पता चला कि लालू यादव तो अपने बड़े बेटे तेजप्रताप के साथ उस राजगीर के दौरे पर गए हैं, जहां किसी बड़े सियासी फैसले के पहले नीतीश कुमार जाते रहे हैं। इसमें आश्चर्यजनक पहलू यह है कि सूबे के सीएम को यह भी पता नहीं था कि बिहार के ही एक शहर में बिहार के पूर्व सीएम और उनके मंत्री बेटे गए हुए हैं। नीतीश कुमार का सूचना तंत्र काफी मजबूत माना जाता है। इसलिए यह भी संभव है कि सूचना उन्हें जरूर मिली हो और इसके तस्दीक के लिए वे राबड़ी देवी के आवास पर गए हों। लालू के न मिलने पर करीब 15 मिनट तक नीतीश वहां रहे। उनकी मुलाकात पूर्व सीएम राबड़ी देवी और डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव से ही हो पाई।

राजगीर में जागती है नीतीश की अंतरात्मा

नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि उनकी अंतरात्मा राजगीर में ही जागती है। अंतरात्मा की आवाज पर ही वे कभी भाजपा तो कभी आरजेडी का साथ छोड़ते या हाथ पकड़ते हैं। इस बार तो उल्टा ही हो गया। तरह-तरह की चर्चाओं के बीच लोग नीतीश कुमार के राजगीर जाने की उम्मीद पाले हुए थे। यहां तो लालू ही राजगीर पहुंच गए। खैर, इसमें भी लोगों को राजनीति की गंध मिलने लगी है। लोगों का मानना है कि लालू यादव इस बार नीतीश कुमार को उन्हीं के अंदाज में जवाब देने के मूड में हैं। नीतीश की जगह लालू इस बार अपनी अंतरात्मा जगाने राजगीर गए हैं। फिलहाल, बिहार की सियासी फिजां और सोशल मीडिया में अटकलबाजी का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोग इसे राजनीति से नहीं जोड़ने की बात कह रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बिहार में महागठबंधन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।

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