धनबाद में ट्रेन से सात कछुए मिलना किसी साधारण घटना का संकेत नहीं है। यह बताता है कि तस्करी का नेटवर्क रेलवे मार्गों का दुरुपयोग कर रहा है। योग नगरी ऋषिकेश–हावड़ा ट्रेन में इनका मिलना सुरक्षा के लिए सवाल खड़े करता है।
वन विभाग ने कछुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल ली है। लेकिन बड़ी ज़िम्मेदारी उन तस्करों तक पहुंचने की है जो ऐसे जीवों के व्यापार से लाभ कमाते हैं। ऐसे अपराधों को रोकना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
RPF की तालमेल और तेजी सराहनीय रही। लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि निगरानी को और सख्त करने की जरूरत है। तस्करी रोकने के लिए लगातार कार्रवाई और प्रभावी रणनीति जरूरी है।


