तुर्की ने पहली बार बनाया पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट, सफल उड़ान से किया कमाल, पाकिस्तान की भी होगी बल्ले-बल्ले
तुर्की के पहले नेशनल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कान (KAAN) ने बुधवार को अपनी पहली उड़ान पूरी की। देश की वायु सेना को उन्नत करने के प्रयासों में ये एक अहम सफलता मानी जा रही है। तुर्की ने 2016 में एक राष्ट्रीय लड़ाकू विमान बनाने के लिए अपनी TF-X परियोजना शुरू की। इसके लिए तुर्की एयरोस्पेस फर्म TUSAS ने ब्रिटेन के BAE सिस्टम्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तुर्की ने इस लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए 2017 में 125 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। TUSAS ने एक वीडियो साझा किया जिसमें एक KAAN फाइटर जेट को उड़ान भरते और फिर उत्तरी अंकारा में एक हवाई अड्डे पर लौटते हुए दिखाया गया है।
तुर्की के रक्षा उद्योग निदेशालय (एसएसबी) के प्रमुख हलुक गोरगुन ने सोशल मीडिया पर कहा कि कान की सफल उड़ान के साथ ही हमारे देश को ना केवल पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट मिल गया है बल्कि ऐसी तकनीक भी हासिल हुई है, जो दुनिया के कुछ ही देशों के पास हैं। नया फाइटर जेट शुरू में दो जनरल F-110 इंजन द्वारा संचालित होगा। इसका उपयोग चौथी पीढ़ी के लॉकहीड मार्टिन F-16 जेट पर भी किया जाता है। गोरगुन ने कहा है कि तुर्की का लक्ष्य कान जेट में घरेलू स्तर पर उत्पादित इंजनों का उपयोग करना है, इसके 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। लंबी प्रक्रिया के बा तुर्की ने हाल ही में अमेरिका से अपने 40 एफ-16 लड़ाकू जेट के लिए 79 आधुनिकीकरण किट खरीदने का सौदा भी किया है। तुर्की 40 यूरोफाइटर टाइफून जेट खरीदने में भी रुचि रखता है, जो जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और स्पेन के एक संघ द्वारा निर्मित है।
पाकिस्तान भी इन जेट्स को खरीदने का ख्वाहिशमंद
तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट की सफल उड़ान से पाकिस्तान भी खुश होगा। पाकिस्तान तुर्की के राष्ट्रीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम में मददगार रहा है। तुर्की ने ये फाइटर जेट F16 को रिप्लेस करने के लिए ये विमान बनाया है। इसको खरीदने का इच्छुक पाकिस्तान भी है। पाकिस्तान को ये फाइटर जेट मिलना भारत के लिए जरूर चिंता का सबब हो सकता है।



