ममता और केजरीवाल ने PM के लिए क्यों उछाला खरगे का नाम? कहीं राहुल गांधी का पत्ता काटने की चाल तो नहीं
कहते हैं कि राजनीति में अक्सर जो होता दिखता है, वह वास्तव में होता नहीं। जो कहा जाता है, उसका असल मतलब वह होता ही नहीं। असल में कहना तो कुछ और है, लेकिन जानबूझकर कहते कुछ और हैं। सियासत का तो हुनर ही यही है, शब्दों का खेल। शब्द कुछ, भाव कुछ। निगाह कहीं, निशाना कहीं। कई बार कुछ सिर्फ इसलिए कहा जाता है कि कुछ और छिपाना होता है। मंगलवार को विपक्ष के 28 दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. की बहुप्रतीक्षित मीटिंग दिल्ली के अशोका होटल में हुई। मीटिंग के दौरान ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन की तरफ से पीएम उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम उछाल दिया। दलील दी कि दलित चेहरा होने की वजह से चुनाव में लाभ मिलेगा। उनके इस सुझाव से एक बार तो बैठक में सभी चौंक गए। हालांकि, खरगे ने अपनी दावेदारी से पल्ला झाड़ लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ जो जब तब कांग्रेस को आंखें दिखाने वाली ममता दीदी और दिल्ली के सीएम केजरीवाल अब उसी कांग्रेस के नेता को चुनाव से पहले पीएम कैंडिडेट देखना चाहते हैं? आखिर इस दांव के मायने क्या हैं? कहीं असल रणनीति पीएम उम्मीदवार के लिए राहुल गांधी की दावेदारी का पत्ता साफ करने की तो नहीं? आइए समझते हैं।
ममता ने पहले संयोजक के लिए खरगे का नाम बढ़ाया

मीटिंग से एक दिन पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करने वालीं ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान संयोजक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गठबंधन को संयोजक की जरूरत है क्योंकि ऐसा कोई चाहिए जो सभी 28 दलों के साथ समन्वय बनाए। तालमेल रखे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने I.N.D.I.A. गठबंधन के संयोजक के लिए मल्लिकार्जुन खरगे के नाम का भी सुझाव दे दिया। इस बात का जिक्र करते हुए कि वह दलित समुदाय से आते हैं, जिसका गठबंधन को फायदा भी होगा। दिलचस्प बात ये है कि विपक्षी गठबंधन की बुनियाद रखने वाले, उसके शिल्पकार नीतीश कुमार को शुरुआत से संयोजक पद का दावेदार माना जाता रहा है।
केजरीवाल ने पीएम कैंडिडेट बनाने की बात कही तो दीदी ने भी मिला दिए सुर

ममता ने खरगे को संयोजक बनाने की बात छेड़ी तो अरविंद केजरीवाल उससे एक कदम आगे बढ़कर कांग्रेस अध्यक्ष को गठबंधन की तरफ से पीएम कैंडिडेट बनाने का ही सुझाव दे दिया। उन्होंने कहा कि खरगे को न सिर्फ संयोजक बनाया जाए बल्कि उन्हें पीएम पद के लिए विपक्ष की तरफ से चेहरा भी घोषित किया जाए। केजरीवाल ने कहा, ‘मैंने कुछ रिसर्च किया है और मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि अगर हम चुनाव में किसी दलित चेहरे के साथ जाएं तो उसका बड़ा फायदा होगा। अबतक कोई दलित प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है और इससे हमें काफी मदद मिलेगी, खासकर कर्नाटक में।’ दिल्ली सीएम की इस बात पर ममता ने भी सुर में सुर मिलाए।



