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बजट 2024: आपके म्यूचुअल फंड निवेश को कैसे प्रभावित करेगा?

2024 के केंद्रीय बजट ने म्यूचुअल फंडों पर कर लगाने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं.

आइए देखें कि ये बदलाव आपके निवेश को कैसे प्रभावित कर सकते हैं.

एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने बजट के बाद कर परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि बजट ने कुछ श्रेणियों के लिए कर लाभ को सरल बनाया है, जबकि अन्य में मामूली बदलाव किए हैं.

दीर्घकालिक निवेशकों के लिए लाभ:

बजट का एक प्रमुख बदलाव यह है कि इक्विटी-आधारित योजनाओं (इक्विटी म्यूचुअल फंड) में दो साल से अधिक समय तक रखे गए निवेश पर लगने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कर की दर को 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया है. हालांकि, यह छूट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई है. इसका मतलब है कि छोटे निवेशकों को अभी भी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर का भुगतान नहीं करना होगा. कुल मिलाकर, दीर्घकालिक निवेशकों पर कर प्रभाव मामूली है, खासकर उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों के लिए.

अल्पकालिक निवेशकों पर असर:

बजट ने अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (STCG) कर को 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया है. इसका मतलब है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिटों को दो साल से कम समय में बेचने पर लगने वाला कर बढ़ गया है. यह उन निवेशकों को प्रभावित करेगा जो नियमित रूप से अपना निवेश खरीदते और बेचते हैं.

अन्य प्रकार के म्यूचुअल फंडों पर प्रभाव:

बजट ने गोल्ड और सिल्वर ETF, इक्विटी और हाइब्रिड फंड ऑफ फंड्स (FoF) और अंतर्राष्ट्रीय स्कीमों को फिर से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लाभ के दायरे में ले आया है. पहले, इनका कर लगाने का तरीका डेट फंड जैसा था.

निष्कर्ष:

बजट 2024 ने म्यूचुअल फंडों पर कर लगाने के ढांचे को सरल बना दिया है और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित किया है. हालांकि, अल्पकालिक निवेशकों पर अब अधिक कर लगेगा. कुल मिलाकर, बजट का प्रभाव निवेशकों के लिए मामूली से मध्यम होने की संभावना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे किस प्रकार की म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करते हैं और उनका निवेश का समय सीमा क्या है.

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