दिल्ली में फिर सात में सात! बीजेपी ने बनाया लोकसभा चुनाव में विरोधियों के सफाये का ‘हैट्रिक प्लान’
लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सात सीटों पर कैसे उम्मीदवार उतारे जाएं, इस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में महामंथन हुआ। पार्टी अपने उम्मीदवारों की कतार को आकार देने के लिए व्यापक विचार-विमर्श कर रही है। पार्टी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के रास्ते तलाश रही है, युवाओं पर भरोसा कर रही है और हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार पर विचार कर रही है। हाई प्रोफाइल कैंडिडेट कोटे से किसी सेलिब्रिटी या केंद्रीय मंत्री को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पार्टी मौजूदा सांसदों को दो कसौटियों पर कस रही है। पहली- उनके फिर से जीतने की कितनी संभावना है और दूसरी 2022 के एमसीडी चुनावों में उनकी वजह से पार्टी को कितने वोट मिले।
इस बार भाजपा ने बदली रणनीति
पिछली बार से इतर भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति का विकेंद्रीकरण किया है। केंद्र से एक प्रभारी के बजाय पार्टी ने तीन से चार संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के क्लस्टर बनाए हैं और उनकी निगरानी के लिए स्थानीय नेताओं को नियुक्त किया है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ये स्थानीय नेता सीधे राष्ट्रीय समिति को फीडबैक देंगे, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष जैसे प्रमुख लोग शामिल होंगे। यह कमिटी टिकट वितरण पर अंतिम निर्णय लेने में अहम भूमिका निभाएगी।
एक से ज्यादा महिलाओं को मिल सकता है टिकट
भाजपा का मुख्य फोकस चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर है। पार्टी एक से अधिक महिलाओं को टिकट देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके अतिरिक्त, युवा उम्मीदवारों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी ने यह फैसला किया तो पुराने नेताओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि देश में कहीं भी 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव में उतारे जाने की संभावना नहीं है।
वरिष्ठ नेताओं का कटेगा पत्ता?
पिछली प्रथाओं से हटकर, भाजपा सत्ता विरोधी कारकों की बारीक जांच कर रही है। दिल्ली में पांच मौजूदा लोकसभा सांसद 10 साल का कार्यकाल पूरा करने के करीब हैं। पार्टी उन नेताओं को बदलने पर विचार कर रही है जो अपने लोकसभा क्षेत्रों में अलोकप्रिय हो गए हैं या एमसीडी चुनावों में पार्टी के वोट शेयर में महत्वपूर्ण योगदान देने में विफल रहे हैं। भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं और खासकर राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल पूरा कर चुके नेताओं से स्पष्ट कर दिया है कि अगर सांसद बने रहने का मोह नहीं गया है तो फिर लोकसभा चुनाव लड़ना होगा।



