
रांची: सीपीआई (माले) का छात्र-युवा कन्वेंशन, निजीकरण के खिलाफ लड़ाई का ऐलान
रांची में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों ने राज्य के युवाओं, छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पुरानी विधानसभा के सभागार में सीपीआई (माले) की छात्र इकाई आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा ने छात्र-युवा कन्वेंशन का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों ने भाग लिया।
इस कन्वेंशन में सीपीआई (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और विधायक विनोद कुमार सिंह ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने देश और झारखंड के युवाओं के रोजगार, पलायन और स्थायी नौकरी जैसे बुनियादी सवालों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण युवाओं का भविष्य खतरे में है।
**दीपांकर भट्टाचार्य का बयान**
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड में युवाओं की बड़ी संख्या का लाभ सही तरीके से नहीं मिल रहा। राज्य के युवा बेरोजगारी और पलायन से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण स्थायी और सुरक्षित नौकरियां घट रही हैं, और अब पब्लिक सेक्टर में भी ठेका प्रथा बढ़ रही है।
भट्टाचार्य ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया को रोकना होगा, क्योंकि इसके साथ ही शोषण की शुरुआत होती है। उन्होंने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाया कि कोरोना और केंद्र सरकार की नीतियों के चलते राज्य में रोजगार सृजन में कमी आई है। उन्होंने चुनावों में युवाओं के मुद्दे को प्रमुखता देने की बात की।
**विधायक विनोद कुमार सिंह का संबोधन**
माले विधायक विनोद कुमार सिंह ने भी कन्वेंशन को संबोधित किया और कहा कि भाजपा ने हमेशा सरकार के काम में बाधा डाली है। चाहे ओबीसी को आरक्षण की बात हो या निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को 75% आरक्षण देने की बात, भाजपा ने हर बार रोड़े अटकाए हैं।
**राजनीतिक विश्लेषक की राय**
पत्रकार अशोक कुमार ने कहा कि विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही युवाओं के मुद्दे राजनीतिक दलों के केंद्र में आ गए हैं। युवाओं की एक बड़ी संख्या 18 से 30 वर्ष की उम्र के बीच है, जो एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है। इसलिए राजनीतिक दल युवाओं के मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं।


