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हमास-इजरायल युद्ध पर पुतिन ने तोड़ी चुप्पी, अमेरिका को बताया जिम्मेदार, फिलिस्तीन के हक का किया समर्थन

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इजरायल और हमास के बीच के युद्ध पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका की विफलता दिखाता है। इसके अलावा पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों ने फिलिस्तीनी लोगों के हितों का ध्यान नहीं रखा। रूस ने कहा कि वह दोनों पक्षों से संपर्क मे है।

 इजरायल और हमास के बीच युद्ध चल रहा है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इसे लेकर अपना रिएक्शन दिया है। पुतिन ने मंगलवार को कहा कि इजरायल और गाजा का संघर्ष अमेरिका की मध्य पूर्व नीति की असफलता को दिखाता है। इसके साथ ही उन्होंने एक स्वतंत्र संप्रभु फिलिस्तीन के निर्माण को आवश्यक बताया। न्यूज एजेंसी एपी की खबर के मुताबिक मॉस्को में इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से मुलाकात के दौरान पुतिन ने यह टिप्पणी की है।

पुतिन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग मुझसे सहमत होंगे। यह अमेरिका की मिडल ईस्ट में राजनीति की विफलता का साफ उदाहरण है।’ इसके अलावा उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी देश के निर्माण को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्णयों को लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे को हल करने में एकाधिकार जमाने की कोशिश की थी। लेकिन दुर्भाग्य से वह वह ऐसा कोई समझौता नहीं खोज सके जो दोनों पक्षों को मंजूर हो।

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दोनों पक्षों से संपर्क में

पुतिन ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘पश्चिमी देशों ने फिलिस्तीनी लोगों के बुनियादी हितों को ध्यान में नहीं रखा।’ पुतिन से पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि फिलिस्तीन का निर्माण इजरायल में शांति के लिए सबसे जरूरी समाधान था। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन की ओर से मंगलवार को कहा गया कि इजरायल पर हमास के हमले से पहले फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की रूस यात्रा की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि इसकी तारीख निर्धारित नहीं हुई थी। रूस की ओर से कहा गया कि वह दोनों पक्षों के संपर्क में है।

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इजरायल को सुनक ने दिया समर्थन

इजरायल पर हमास ने हमला बोला। पश्चिमी देशों की ओर से इजरायल को समर्थन मिल रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं से बात की। इसके अलावा उत्तरी लंदन में एक यहूदी उपासनागृह में आयोजित प्रार्थना सभा में वह शामिल हुए। उन्होंने यहूदी समुदाय के लोगों को आश्वस्त किया कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि हम मानते हैं कि हमास की कार्रवाई की निंदा की जानी चाहिए। आतंकवाद का कोई मतलब नहीं।

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