शुक्रवार को सुनीदा पवार ने कहा कि वह सिर्फ महाराष्ट्र के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के दो गुटों के एकजुट होने से राज्यभर में पार्टी की ताकत बढ़ेगी।
एनसीपी का विभाजन और परिवार की एकता:
- एनसीपी का विभाजन जुलाई 2023 में हुआ, जब अजित पवार एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए।
- चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को पार्टी का नाम और ‘घड़ी’ का चुनाव चिह्न दिया, जबकि शरद पवार के गुट को एनसीपी (एसपी) नाम दिया गया।
सुनीदा पवार ने कहा कि परिवार ने शरद पवार के 84वें जन्मदिन के मौके पर दिल्ली में 6 जनपथ स्थित उनके आवास पर एकजुटता दिखाई। इस मौके पर अजित पवार, उनके बेटे पार्थ और रोहित पवार मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान जरूरी:
सुनीदा ने कहा, “पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी एकजुट हो। नेतृत्व को उनकी भावनाओं को समझना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में उनकी कोई भूमिका नहीं है और वह हमेशा सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं।
गुटबाजी के बावजूद उम्मीद:
- लोकसभा चुनावों में एनसीपी (एसपी) ने महाराष्ट्र में 8 सीटें जीतीं, जबकि अजित पवार गुट को सिर्फ 1 सीट मिली।
- विधानसभा चुनावों में अजित पवार गुट को 41 सीटें मिलीं, जबकि शरद पवार गुट ने 10 सीटें जीतीं।
पुणे एनसीपी प्रमुख दीपक मनकर ने कहा, “कार्यकर्ताओं की भावनाएं दोनों गुटों को एक करने की हैं, लेकिन अंतिम फैसला अजित पवार और शरद पवार पर निर्भर है।”
आइडियोलॉजी पर अडिग रहेंगे शरद पवार:
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अंकुश काकड़े ने कहा, “शरद पवार अपने विचारधारा से कभी समझौता नहीं करेंगे। यदि कोई उनकी विचारधारा से जुड़ता है, तो पवार साहब को आपत्ति नहीं होगी।”



