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चंद्रयान की आज बड़ी परीक्षा, धरती की आखिरी कक्षा में पहुंचेगा, जानें कितनी दूर चांद

चंद्रयान-3 फिलहाल पृथ्वी के चक्कर काट रहा है। मंगलवार (25 जुलाई) के मैनूवर के बाद, यह आखिरी कक्षा में पहुंच जाएगा। इसरो की योजना के अनुसार, दोपहर 2 से 3 बजे पांचवां अर्थ-रेजिंग मैनूवर पूरा किया जाएगा। इसे बेंगलुरु के इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) में बैठे वैज्ञानिक अंजाम देंगे। चंद्रयान-3 अभी 71351 km x 233 km ऑर्बिट में है। 31 जुलाई-1 अगस्त की रात को चंद्रयान-3 के पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चांद की ओर रवाना होने की उम्मीद है। फिर यह चांद की कक्षा में पहुंच उसके चक्कर लगाना शुरू करेगा। चांद तक पहुंचने के लिए भी पांच मैनूवर होंगे। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को लॉन्च किया गया था। इसके 23 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर लैंड करने की संभावना है। धरती के चक्कर लगाता हुआ चंद्रयान-3 चंद्रमा के ऑर्बिट में एंट्री करेगा। चक्कर लगाता हुआ लैंडर मॉड्यूल 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरेगा। मिशन का यही सबसे क्रिटिकल फेज है। इस दौरान सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश की जाएगी।

क्या है चंद्रयान मिशन?

चंद्रयान-3 मिशन में एक स्वदेशी प्रपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और एक रोवर शामिल है। मिशन में चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचना, लैंडर का उपयोग करके चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट-लैंडिंग करना’ और चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने के लिए लैंडर से एक रोवर का निकलना और फिर इसका चंद्रमा की सतह पर घूमना शामिल है।

चंद्रयान-3 का लाइव लोकेशन अपडेट

दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन सकता है भारत

23-24 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। सॉफ्ट लैंडिंग का मतलब है पूरे नियंत्रण के साथ सतह पर सुरक्षित उतारना। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है, तो भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा। यह लैंडिंग इसलिए भी खास होगी कि चंद्रमा का यह हिस्सा अब तक इंसान की नजरों से छिपा रहा है। अब तक रूस, अमेरिका और चीन चंद्रमा पर बेशक अपने यान उतार चुके हैं मगर वह चांद के दूसरे हिस्सों में किया गया था।

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