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बात कुछ और है… अविश्वास प्रस्ताव पर कैसे विपक्ष और सरकार के बीच चल रहा नहले पर दहले का खेल

संसद के मॉनसून सत्र में अब तक सिर्फ हंगामा ही देखने को मिला है। मणिपुर के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही एक दिन भी ठीक से नहीं चली। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी मांग पर अड़े हैं। वहीं इस बीच बुधवार विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। अब ऐसे में सवाल है कि संख्याबल कम होने के बावजूद विपक्ष ऐसा क्यों कर रहा। विपक्ष पहले से ही कह रहा कि सवाल नंबर का नहीं है। तब ऐसा क्यों? विपक्ष पहले से अधिक एकजुट है क्योंकि अभी हाल ही में नया गठबंधन I.N.D.I.A बना है। तो वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी I.N.D.I.A पर करारा हमला बोला है। सरकार भी इस पूरे मामले पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में मॉनसून सत्र में भले ही काम का सूखा पड़ा है तो क्या दोनों ही ओर से 2024 के लिए जमीन तैयार की जा रही है।

अविश्वास प्रस्ताव पर क्या कह रहा है विपक्ष

लोकसभा में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बुधवार मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 9 वर्षों में यह दूसरा मौका है जब यह सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में उसके सांसद गौरव गोगोई द्वारा पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस ( I.N.D.I.A) का सामूहिक प्रस्ताव है। कांग्रेस की ओर से मांग की गई है कि इस पर कल यानी गुरुवार को ही सदन में चर्चा आरंभ होनी चाहिए। हालांकि लोकसभा स्पीकर की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई है। पार्टी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि मणिपुर के हालात ने मजबूर किया है कि यह अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। इसके अलावा केसीआर की पार्टी ने अलग से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।

विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A के निशाने पर मोदी
मणिपुर के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर संसद के भीतर बयान देने का दबाव पिछले कई दिनों से विपक्ष की ओर से बनाया जा रहा है। विपक्षी दलों का नया गठबंधन I.N.D.I.A मणिपुर के मामले में पीएम मोदी के बयान पर अड़ा हुआ है। यह दबाव काम नहीं आया तब विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता अपनाया गया। विपक्ष का यह मानना है कि वह इसके जरिए सरकार को चर्चा के लिए विवश करेगी। विपक्ष को यह बात पता है कि लोकसभा में चर्चा के दौरान ज्यादा उसे ज्यादा वक्त न मिले क्योंकि समय का आवंटन सदन में दलों के संख्या बल के हिसाब से किया जाता है। I.N.D.I.A में कई ऐसे दल हैं जिनके लोकसभा में कोई सांसद नहीं। इसको ध्यान में रखकर उसकी ओर से रणनीति तैयारी की जा रही है। विपक्ष का मानना है कि पूरे देश का ध्यान मणिपुर पर ‘अविश्वास प्रस्ताव’ पर होगा और इससे परसेप्शन के खेल में विपक्ष को मदद मिल सकती है। विपक्षी दल के नेता बोलेंगे और मणिपुर का जिक्र कर वह सरकार पर निशाना साधेंगे। हालांकि यह भी देखने वाली बात होगी कि पीएम मोदी को जवाब देने के लिए विपक्ष की ओर से कौन मोर्चा संभालता है। हालांकि इन सबके बीच विपक्षी दलों के निशाने पर पूरी तरह से पीएम मोदी रहेंगे क्योंकि अगले चुनाव में लड़ाई इसी चेहरे पर लड़ी जानी है।I.N.D.I.A पर हमला बोल पीएम मोदी ने जता दिए इरादे
मॉनसून सत्र के बीच पीएम मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में I.N.D.I.A पर करारा हमला बोला। पीएम ने कहा कि पहले ईस्ट इंडिया कंपनी आई। फिर इंडियन मुजाहिदीन । इसी तरह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया भी बना। मोदी ने कहा कि अगर ये सोच रहे हैं कि पहले की तरह का भारत है और लोगों को गुमराह कर लेंगे तो यह गलत सोच रहे हैं। वहीं इस बीच पीएम मोदी का एक वीडियो भी आज सोशल मीडिया पर छाया रहा जिसमें केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की विपक्षी दलों की योजना के बीच 2018 में उन्होंने विपक्ष का उपहास करते हुए कहा था कि उन्हें 2023 में भी ऐसा ही प्रस्ताव लाने की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने लोकसभा में 2018 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा था, मैं आपको अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं कि आप इतनी तैयारी करें कि 2023 में फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का आपको मौका मिले। चर्चा का जवाब पीएम मोदी देंगे ऐसे में उनके निशाने पर विपक्षी दल रहेंगे और इसकी झलक मिल भी चुकी है।

I.N.D.I.A बनाम NDA की लड़ाई तेज
लोकसभा चुनाव से पहले इसे I.N.D.I.A बनाम NDA की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। I.N.D.I.A नया गठबंधन बनने के बाद विपक्ष चर्चा के केंद्र से हटना नहीं चाहता। इस गठबंधन के बाद यह संसद का पहला सत्र है और इस सत्र में विपक्ष पूरी मजबूती के साथ एक साथ दिखना चाहता है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के निलंबन पर ऐसा देखने को इसी सत्र में मिला। बुधवार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी कहा कि हम उनके साथ हैं। इस सत्र के बाद कई राज्यों के चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी और फिर लोकसभा का चुनाव ऐसे में विपक्ष पूरी तरह एकजुट दिखना चाहता है। वहीं दूसरी ओर एनडीए को भी पता है कि मुकाबला इन्हीं दलों के साथ होना है इसलिए अभी से इन पर प्रहार शुरू हो गया है। मणिपुर का मसला मॉनसून सत्र के केंद्र में जरूर है लेकिन असली लड़ाई I.N.D.I.A बनाम NDA की है।

संसद में सरकार और विपक्ष किसके साथ कितने सदस्य
लोकसभा में नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। नौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब यह सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी। इससे पहले, जुलाई, 2018 में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सिर्फ 126 वोट पड़े थे, जबकि इसके खिलाफ 325 सांसदों ने मत दिया था। इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव का भविष्य पहले से तय है क्योंकि संख्याबल स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) के पक्ष में है और निचले सदन में विपक्षी समूह के 150 से कम सदस्य हैं।

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