कोर्ट ने कहा कि यह एक महिला के लिए अपमानजनक है और इसे एक सामाजिक बुराई माना जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को उनके वैवाहिक स्थिति के आधार पर नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व और योगदान के आधार पर आंका जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को समाज में समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
यह मामला एक महिला द्वारा दायर की गई याचिका पर आया था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके पति और उसके परिवार के सदस्य उसे ‘तलाकशुदा’ कहकर अपमानित करते हैं। महिला ने कहा कि इस तरह के शब्दों का उपयोग उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है।
कोर्ट ने महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि ‘तलाकशुदा’ शब्द का इस्तेमाल महिलाओं के लिए अपमानजनक है और इसे समाज से खत्म किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को अपने जीवन में आगे बढ़ने और नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है? यह फैसला महिलाओं के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। यह फैसला यह दर्शाता है कि कोर्ट महिलाओं के खिलाफ होने वाले भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह फैसला अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा जो इस तरह के भेदभाव का सामना कर रही हैं।


