कोलकाता/शांतिनिकेतन: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की कमी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (सूओ मोटो) लिया है और विश्वविद्यालय प्राधिकरणों को जमकर फटकार लगाई है। अधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति विश्वविद्यालय की उदासीनता पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
एनजीटी ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय प्राधिकरणों को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक उचित प्रणाली न होने पर कड़ी आलोचना की है। अधिकरण के अनुसार, एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के परिसर में पर्यावरण मानकों का पालन न करना अस्वीकार्य है। यह मामला पर्यावरण को होने वाले नुकसान और अपशिष्ट प्रबंधन कानूनों के खुलेआम उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।
अधिकरण ने विश्वविद्यालय को अगले दो महीनों के भीतर परिसर में अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान स्थिति, सुधार के लिए उठाए गए कदमों और एक ठोस कार्ययोजना के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। एनजीटी की इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन पर पर्यावरण संबंधी नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। यह निर्णय सभी संस्थानों के लिए एक संदेश है कि पर्यावरण कानूनों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



