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संपत्ति घोटाले में आरोपियों की भूमिका पर कोर्ट की नजर और तेज हुई.

केस डायरी उपलब्ध न होने से स्निग्धा सिंह की जमानत अटकी रही.

हजारीबाग की विवादित वन भूमि और आय से अधिक संपत्ति के मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। रांची एसीबी कोर्ट में हुई सुनवाई में एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया। स्निग्धा सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन केस डायरी प्रस्तुत न होने के कारण कोर्ट ने निर्णय टाल दिया। अदालत ने एसीबी से पूछा कि इतने गंभीर मामले में दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं हैं। इसपर एसीबी ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया। कोर्ट ने आगे की तारीख तय कर दी है।

यह मामला केवल वन भूमि घोटाले तक सीमित नहीं है बल्कि कई वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। IAS अधिकारी विनय चौबे के नाम पर कई संदिग्ध संपत्तियाँ मिली हैं। उनकी पत्नी स्वप्न संचिता की भूमिका भी जांच के दायरे में है। नेक्सजेन मालिक विनय सिंह पर कई बड़े निवेशों के आरोप हैं। इसके अलावा शिपिज त्रिवेदी और उनकी पत्नी के वित्तीय लेनदेन संदेहास्पद पाए गए। सत्येंद्र नाथ त्रिवेदी तक इस आर्थिक नेटवर्क में शामिल पाए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में एसीबी ने पाया कि सभी आरोपियों ने मिलकर अवैध संपत्ति को वैध रूप देने की कोशिश की। कई कंपनियों और खातों के जरिए पैसा स्थानांतरित किया गया। जांच अधिकारियों ने बताया कि घोटाले का दायरा काफी बड़ा है। कोर्ट भी इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है। अगली सुनवाई से पहले केस डायरी पेश करना अनिवार्य कर दिया गया है। आने वाले दिनों में इस केस में कई खुलासे हो सकते हैं।

 

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