झारखंड की जेलों में बंद कैदियों की रिहाई से जुड़ा मामला एक बार फिर हाईकोर्ट में उठा। बुधवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। याचिका में कहा गया कि कई कैदी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद वे जेल में बंद हैं। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर माना।
राज्य सरकार ने अदालत में अपना जवाब दाखिल किया। सरकार की ओर से जेलों में बंद कैदियों का विस्तृत आंकड़ा प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह जानकारी प्रार्थी को सॉफ्ट कॉपी में दी जाए। अदालत ने कहा कि आंकड़ों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
याचिका स्टेन स्वामी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दाखिल की गई है। पूर्व में कोर्ट ने सजा पुनरीक्षण बोर्ड को मामलों पर विचार करने को कहा था। अदालत ने कहा कि रिहाई की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए। यह विषय जेल सुधार से जुड़ा है। अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।



