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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में खरीफ कर्मशाला का दूसरा दिन संपन्न हुआ.

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को जिम्मेदारी निभाने का कड़ा निर्देश दिया.

रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला 2026 का दूसरा दिन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्थान के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। किसानों के हितों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्मशाला में कृषि प्रभाग के निदेशकों की अनुपस्थिति पर मंत्री ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए समर्पित अधिकारियों को सम्मान मिलेगा। वहीं लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने संभावित सूखे की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कम बारिश की आशंका को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। किसानों तक समय पर सहायता पहुंचाना विभाग की जिम्मेदारी है।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को जिला स्तर पर बेहतर तैयारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 15 मई को सभी जिलों में बैठक आयोजित की जाए। प्रखंड स्तर के अधिकारियों को भी इसमें शामिल करने को कहा गया। 20 मई को जिला स्तर पर खरीफ मेला आयोजित करने का निर्देश दिया गया। हर जिले में 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया। पंचायत स्तर तक किसानों को योजनाओं की जानकारी देने पर जोर दिया गया। मंत्री ने सॉइल टेस्टिंग काउंटर लगाने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को सरल तरीके से योजनाओं की जानकारी दी जानी चाहिए। बीज वितरण में स्वयं सहायता समूह और एफपीओ की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।

कार्यक्रम में पशुपालन, मत्स्य और भूमि संरक्षण योजनाओं पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने पशुओं की दवा वितरण प्रक्रिया समय पर पूरी करने का निर्देश दिया। तालाबों के जीर्णोद्धार और मत्स्य बीज वितरण को मई अंत तक पूरा करने की बात कही गई। सोलर पंप और ड्रिप इरीगेशन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एससी दुबे ने जल संरक्षण की आवश्यकता बतायी। विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ने कहा कि सूखे से निपटने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की उन्नत खेती और बीज चयन की जानकारी दी। मिलेट्स खेती और मिट्टी संरक्षण पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में सूखा प्रबंधन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखायी गई। राज्यभर के कृषि पदाधिकारी और वैज्ञानिक कार्यक्रम में मौजूद रहे।

 

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