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कोलकाता में झारक्राफ्ट इम्पोरियम खुलने से कारीगरों को मिलेगा नया बाजार.

झारखंड की हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा अब.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में झारक्राफ्ट के नए इम्पोरियम की शुरुआत हुई है। उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने बुधवार को इसका उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में उद्योग सचिव अरवा राजकमल भी शामिल हुए। मंत्री ने कहा कि यह इम्पोरियम केवल बिक्री केंद्र नहीं होगा। यह झारखंड के कारीगरों की मेहनत और आत्मविश्वास का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इसका लाभ मिलेगा। झारक्राफ्ट राज्य के बुनकरों और कलाकारों को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। मंत्री ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक कला देशभर में अपनी अलग पहचान बना रही है। समारोह में कई विभागीय पदाधिकारी और अतिथि मौजूद रहे।

उद्योग मंत्री ने कहा कि कोलकाता जैसे ऐतिहासिक शहर में इम्पोरियम का खुलना गर्व का विषय है। झारखंड अपनी हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यहां की तसर सिल्क और डोकरा कला की विशेष पहचान है। मंत्री ने कहा कि झारक्राफ्ट कारीगरों को राष्ट्रीय मंच देने का काम कर रहा है। इम्पोरियम में पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन का आकर्षक संगम देखने को मिलेगा। ग्राहकों को झारखंड के विशेष उत्पाद एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। उद्योग सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि यह पहल सांस्कृतिक आदान प्रदान को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि कोलकाता के लोग झारखंड की कला को करीब से जान सकेंगे। इससे दोनों राज्यों के सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे। कार्यक्रम के दौरान झारखंडी कला की विशेष प्रस्तुति भी दी गई।

झारक्राफ्ट की प्रबंध निदेशक गरिमा सिंह ने समारोह में सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कोलकाता में इम्पोरियम को अच्छा प्रतिसाद मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में अन्य शहरों में भी विस्तार की योजना बनाई जा रही है। इम्पोरियम में साड़ियां, कुर्तियां और रेशमी कपड़े उपलब्ध हैं। इसके अलावा शॉल, स्कार्फ और लेदर बैग भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हस्तनिर्मित उत्पादों की गुणवत्ता ग्राहकों को पसंद आ रही है। झारखंड के हजारों कारीगरों को इससे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। इससे राज्य की कला और हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी। कार्यक्रम में उद्योग विभाग और झारक्राफ्ट के अधिकारी मौजूद रहे। फिलहाल इस पहल को झारखंड के कारीगरों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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