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बिहार शिक्षक भर्ती नियमावली: राज्यकर्मी का दर्जा भी फरेब? टीचर कैंडिडेट में भारी कन्फ्यूजन, 1 लाख 70 हजार वैकेंसी किसके लिए

बिहार में शिक्षक भर्ती नियमावली के तहत आयोजित होनेवाली परीक्षा का मामला उलझता जा रहा है। नई-नई उलझनें सामने आने से अभ्यर्थियों में रोष बढ़ता जा रहा है। अब तक तो बीपीएससी से परीक्षा न देने को लेकर अभ्यर्थियों में विरोध था। अब तो सातवें चरण के अभ्यर्थियों के सामने कई नए संकट खड़े हो गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सातवें चरण के अभ्यर्थियों को होने जा रही है। क्या है नई उलझन, इसे जानिए।

BPSC की घोषित सीट किसके लिए है?

बिहार सरकार ने नियमावली के तहत लगभग पौने दो लाख शिक्षकों की बहाली बीपीएससी से कराने जा रही है। परंतु बिहार सरकार ने ये स्पष्ट नहीं किया कि क्या ये बहाली सिर्फ सातवें चरण के अभ्यर्थियों के लिए है? संख्या से लग रहा है कि ये परीक्षा सिर्फ सातवें चरण के अभ्यर्थियों के लिए है। लेकिन बिहार सरकार ने निर्देश दिया है कि नियोजित शिक्षक राज्यकर्मी बनना चाहते हैं तो आगामी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। सरकार के इस निर्देश ने शिक्षक अभ्यर्थियों की बीच कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है। सरकार के इस निर्देश से परेशान सातवें चरण के अभ्यर्थियों ने भी अपना हक जताया है। इनका कहना है कि एक लाख 70 हजार पदों पर सिर्फ सातवें चरण के अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी चाहिए। पुराने अभ्यर्थियों के लिए अलग से परीक्षा कंडक्ट कराएं। नए अभ्यर्थियों की परेशानी है कि नियोजित शिक्षक अगर शामिल होते हैं तो उनकी हकमारी होगी। 50 प्रतिशत भी सफल हो गए तो नए अभ्यर्थियों को मौका ही नहीं मिलेगा। इसलिए सातवें चरण के अभ्यर्थियों की सरकार से स्पष्ट मांग है कि इस एक लाख सत्तर हजार पर सिर्फ उनका हक है। पुराने अभ्यर्थियों के लिए अलग से पद की घोषणा करें।

1-6 फेज में बहाल नियोजित शिक्षक भी दुविधा में?

अब तक बहाल शिक्षकों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख हैं। ये शिक्षक भी इस दुविधा में हैं कि क्या उन्हें भी सातवें चरण के लिए बीपीएससी की परीक्षा में नए अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा में शामिल होना होगा? अगर ये परीक्षा में शामिल होते हैं और सफल हो गए तो क्या इनकी नियुक्ति नए कर्मी जैसी ही होगी? पुरानी जो सेवा की है वो खुद-ब-खुद ही समाप्त हो जाएगी। इस वजह से इनकी मांग है कि नियोजित शिक्षकों को अनुभव के आधार पर राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। ये लोग बीपीससी की होनेवाली परीक्षा का बॉयकॉट कर रहे हैं।

नियमावली में वेतनमान को लेकर भी लोचा

शिक्षक भर्ती नियमावली के तहत राज्य सरकार का नया वेतन भी आ गया है। इसे चार स्लैब में बांटा गया है। पहला स्लैब कक्षा 1-5, दूसरा कक्षा 6-8, तीसरा कक्षा 9-10 और चौथा कक्षा 11-12 को बनाया गया है। पहले स्लैब को 25 हजार, दूसरे को 28 हजार, तीसरे को 31 और चौथे स्लैब को 32 हजार वेतन के मद में मिलेगा। यहां शिक्षक संघ का मानना है कि ये राज्यकर्मी का वेतनमान नहीं है। ये आकर्षक वेतनमान है। इसमें राज्यकर्मी को जो सुविधा मिल रही है, वो शिक्षकों को नहीं मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण है प्रमोशन। राज्यकर्मी को दस-दस वर्षों पर प्रमोशन मिलता है, उससे शिक्षक वंचित रहेंगे। इनमें से कोई भी प्रधानाध्यापक नहीं बन पाएगा। ऐसी कई कमियां हैं। इसको लेकर संघ लगातार विरोध कर रहा है। संघ की मंशा है कि सभी नियोजित शिक्षकों को अनुभव के आधार पर नया वेतनमान और राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। उन्हें परीक्षा में नहीं उलझाया जाए।

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