World

दिल्ली का शंकर, मैसूर की रिची, बन जाए ये लव स्टोरी, जरा इनके मिलन की दुआ कीजिए

आजकल दिल्ली और मैसूर के चिड़ियाघर के अधिकारी एक बड़े सवाल और जिम्मेदारी से जूझ रहे हैं। क्या वो इस जिम्मेदारी को पूरी कर पाएंगे? या फिर क्या उन्हें इसके लिए कोशिश करनी चाहिए? दरअसल, ये कहानी शंकर (Shankar) और रिची (Richie) की है। ये दोनों अफ्रीकी मूल के हाथी और हथिनी हैं। तो फिर मुश्किल क्या है? चिड़ियाघर के अधिकारियों के पास मुसीबत बहुत बड़ी है। शंकर की उम्र 27 साल है। वो दिल्ली के चिड़ियाघर में 2001 से रह रहा एकलौता अफ्रीकी हाथी है। अफ्रीकी हाथी एशियाई हाथियों से अलग होते हैं और यही सबसे बड़ी मुश्किल है।


मुश्किल है बड़ी

शंकर के साथ लाई गई एक हथिनी की मौत हो चुकी है। वहीं, मैसूर के चिड़ियाघर में रह रही 20 साल की रिची भी अकेली है। 2016 में उसके पिता की मौत के बाद से वह चिड़ियाघर में अकेली है। गौरतलब है कि अफ्रीकी हाथी धरती पर सबसे बड़े जानवर हैं और ये एशियाई हाथियों से अलग होते हैं। यही नहीं, शंकर और रिची दोनों को उनके चिड़ियाघर में एशियाई हाथियों से अलग रखा गया है। लेकिन चाहे अफ्रीकी हाथी हों या फिर एशियाई हाथी, ये सभी सामाजिक जानवर होते हैं और वे अपने साथी की तलाश में होते हैं।

रिची का जन्म मैसूर के चिड़ियाघर में हुआ है। ये 1970 में जर्मनी से लाए गए दो अफ्रीकी हाथी-हथिनी की संतान है। शंकर को जंगल से पकड़ा गया था। शंकर और एक हथिनी को 1998 में जिम्बाब्वे ने उपहार के तौर पर भारत को सौंपा था।

कोर्ट में भी चला गया मामला

2021 में दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले में एक याचिका भी दाखिल की गई थी। याचिका में शंकर को कहीं और भेजने की मांग की गई थी। इस महीने के शुरू में दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता निकिता धवन को सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमिटी में जाने को कहा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button