कपिल सिब्बल की दलीलें और CJI चंद्रचूड़ के सवाल, अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की 10 बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधान को केंद्र ने 2019 में खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ताओं से पूछा कि यह प्रावधान तो अस्थायी था, स्थायी कैसे बन गया? सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच का फोकस इसी सवाल पर रहा। सुप्रीम कोर्ट ने नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन के वकील कपिल सिब्बल से कई सवाल किए। सिब्बल ने अपनी दलीलों में 1846 की लाहौर संधि का हवाला देते हुए कश्मीर मुद्दे का ऐतिहासिक पहलू समझाया। सिब्बल का कहना था कि ‘राज्य स्वतंत्र रहना चाहता था मगर अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान के समर्थन वाले सैन्य आक्रमण के चलते कश्मीर के महाराजा को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर साइन करना पड़ा।’ सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर पहले दिन चली सुनवाई की 10 बड़ी बातें।
- एक राजनीतिक कार्रवाई के माध्यम से अनुच्छेद 370 को खिड़की से बाहर फेंक दिया गया। यह कोई संवैधानिक कार्य नहीं था। संसद ने खुद संविधान सभा की भूमिका निभाई और अनुच्छेद 370 को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छा का प्रयोग कर रही है। क्या ऐसी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है?’
- ‘कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि जम्मू-कश्मीर के लोग भारत का अभिन्न अंग हैं, लेकिन एक विशेष रिश्ता है जो अद्वितीय है और जिसे अनुच्छेद 370 में ही तैयार किया गया है।’
- ‘कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना आप उस रिश्ते को खत्म नहीं कर सकते।’
- ‘आप एक राज्य की सीमा बदल सकते हैं, आप एक बड़े राज्य की सीमाओं को विभाजित करके छोटे राज्य बना सकते हैं। लेकिन इस देश के इतिहास में कभी भी एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित नहीं किया गया है।’
एक ऑर्डर से खत्म नहीं हो सकता आर्टिकल 370
J&K भारत का अभिन्न अंग है लेकिन भारत और J&K के लोगों के बीच अनुच्छेद 370 के जरिए खास रिश्ता है। इसे एक्जीक्यूटिव ऑर्डर से खत्म नहीं किया जा सकता है। सरकार ने इसे खत्म करते हुए खुद से ही J&K और संविधान सभा के लोगों की भूमिका मान ली, क्या संवैधानिक रूप से ऐसा संभव है?
कपिल सिब्बल, याचिकाकर्ता के वकील




