जरा ध्यान से सुन लीजिए.. सरदार पटेल, पंडित नेहरू की वो ‘ना’ जो अमित शाह ने विपक्ष को आज दो बार सुनाई
गृह मंत्री अमित शाह ने आज दिल्ली सर्विस बिल पर बहस के दौरान जोर देकर कहा कि दिल्ली को राज्य नहीं बनाने की सिफारिश पंडित जवाहर लाल नेहरू की थी। उन्होंने विपक्ष की तरफ इशारा करते हुए कि जिसका आप विरोध कर रहे हैं, उसके बारे में जान लेना चाहिए था कि ये सिफारिश खुद देश के पहले पीएम की थी। शाह ने कहा कि यही नहीं, सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद और डॉ भीमराव आंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था।
सीतारमैया कमिटी का जिक्र
शाह ने कहा कि आजादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति ने दिल्ली को राज्य स्तर का दर्जा देने की सिफारिश की थी। हालांकि जब सिफारिश संविधान सभा के सामने आई (मेरा विपक्ष के सदस्यों को विनम्रता से अनुरोध है कि इस बात को जरा गौर से सुनिएगा) जब सदन के सामने आई तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद, डॉ भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि ये उचित नहीं होगा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। मैं फिर से एक बार रिपीट करता हूं कि किस-किस ने विरोध किया, नेहरू, पटेल, राजाजी, प्रसाद आंबेडकर ने किया था।
पंडित नेहरू के चर्चा को किया कोट
शाह ने कहा कि उस वक्त पंडित नेहरू के चर्चा के एक हिस्से को सदन में रखता हूं। शाह ने कहा, ‘दो साल पहले सदन ने एक समिति सीतारमैया कमिटी की नियुक्ति की और जब रिपोर्ट आई तो दुनिया बदल गई है। दिल्ली काफी हद तक बदल गई है। इसलिए दिल्ली में हुए उन परिवर्तनों की परवाह किए बगैर उस समय की सिफारिशों को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। स्वीकार करना वास्तविकता से पूरी तरह मुंह मोड़ लेने जैसा होगा। नेहरू ने संविधान सभा के सदस्यों को यहां तक कहा कि चूंकि नई दिल्ली में तीन चौथाई संपत्ति केंद्र सरकार की है इशलिए तर्कसंगत यही होगा कि इसको केंद्र के अधीन रखा जाए।
जब सदन के सामने सीतारमैया की सिफारिश आई तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद, डॉ भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं ने इसका विरोध किया था।
लोकसभा में अमित शाह
आंबेडकर के बयान को भी बताया
शाह ने कहा कि जब आंबडेकर ने इस चर्चा को समाप्त किया तब उन्होंने कहा कि जहां तक दिल्ली का सवाल है तो हमें ऐसा लगता है कि भारत की राजधानी के रूप में शायद ही किसी स्थानीय प्रशासन को मुक्त अधिकार यहां दिए जा सकते हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जो राजधानी के क्षेत्र हैं इसकी मिसाल भी उन्होंने दी थी। इसके लिए एक अलग व्यवस्था करनी चाहिए और संविधान सभा में इसे जोड़ना चाहिए।




