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ऐसा साहस, ऐसा पराक्रम! वीरता पुरस्कारों से सम्मानित इन योद्धाओं की कहानियां वाकई अद्भुत हैं

देश आज 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वीरता पुरस्कारों का ऐलान गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की गई है। इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों के 80 वीरों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित करने की मंजूरी दी है, जिनमें 12 मरणोपरांत पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों में छह कीर्ति चक्र (तीन मरणोपरांत), 16 शौर्य चक्र (दो मरणोपरांत), 53 सेना मेडल (सात मरणोपरांत), एक नौसेना मेडल (वीरता) और चार वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि तीन कीर्ति चक्र और दो शौर्य चक्र मरणोपरांत प्रदान किए जाएंगे। ये पुरस्कार क्रमशः युद्धकाल के महावीर चक्र और वीर चक्र के समकक्ष हैं। मंत्रालय ने बताया कि कीर्ति चक्र के लिए चुने गए वीरों में मेजर दीपेंद्र विक्रम बस्नेत (4 सिख), मेजर दिग्विजय सिंह रावत (21 पैरा स्पेशल फोर्सेज), कैप्टन अंशुमान सिंह (आर्मी मेडिकल कोर, 26 पंजाब – मरणोपरांत), हवलदार पवन कुमार यादव (21 महार रेजिमेंट), हवलदार अब्दुल माजिद (9 पैरा स्पेशल फोर्सेज- मरणोपरांत) और सिपाही पवन कुमार (ग्रेनेडियर्स, 55 राष्ट्रीय राइफल्स – मरणोपरांत) शामिल हैं। इन सूरवीरों की गाथाएं हरेक देशवासी और भारत मां के सपूतों की प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

मणिपुर में घुसते ही 21 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के ट्रूप कमांडर मेजर दिग्विजय सिंह रावत ने एक इनोवेटिव और मजबूत खुफिया नेटवर्क का निर्माण किया। इस नेटवर्क के जरिए उन्होंने महीनों की मेहनत से घाटी के विद्रोही समूहों (वीबीआईजी) का सटीक नक्शा बनाया। एक ऑपरेशन के दौरान मेजर रावत को सूचना मिली कि वीबीआईजी एक वीआईपी को मणिपुर में निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर मेजर रावत ने अपने एक सूत्र को सक्रिय किया जिसने विद्रोही समूहों को भटका दिया। वह सूत्र सफलतापूर्वक विद्रोही समूह को उसी इलाके में ले गया, जहां मेजर दिग्विजय सिंह की टीम उनका इंतजार कर रही थी। आतंकवादियों ने सैनिकों को देखते ही ऑटोमेटिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन, गोलियों की बौछार के बीच भी हार नहीं मानते हुए मेजर रावत ने अपनी टीम को कुशलता से नियंत्रित किया और खुद रेंगते हुए आतंकवादियों के एक स्वयंभू कैप्टन को मार गिराया और दूसरे को घायल कर दिया। खुफिया जानकारी के अनुसार, ये दोनों ही असम राइफल्स पर घात लगाकर हमला करने के मास्टरमाइंड थे। इसी तरह, एक अन्य ऑपरेशन के दौरान मेजर रावत को वीबीआईजी कैडरों के घुसपैठ की सूचना मिली। क्षेत्र के अपनी समझ का उपयोग करते हुए उन्होंने एक नजदीकी निगरानी प्रणाली बनाई और बड़े आतंकियों को सीधी लड़ाई में हराकर पकड़ लिया। साइटेशन में कहा गया है, ‘कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी के प्रति समर्पण, बेजोड़ शौर्य, साहस और रणनीतिक कौशल के लिए मेजर दिग्विजय सिंह रावत को ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया जाता है।’

मेजर दीपेंद्र विक्रम बस्नेत के शौर्य के आगे भला कौन टिकेगा

मेजर दीपेंद्र विक्रम बस्नेत तैनात एक घात के कमांडर थे। 15 जून, 2023 को नियंत्रण रेखा के पास कुपवाड़ा जिले का केरेन सेक्टर में पांच आतंकवादियों के एक समूह के संभावित घुसपैठ के बारे में खुफिया जानकारी मिलने पर घात लगाया गया था। मेजर दीपेंद्र विक्रम बस्नेत की सर्विलांस टीम ने इन आतंकवादियों को देखा और उन्हें चेतावनी दी, लेकिन घुसपैठिये आतंकी नहीं माने। हाई प्रेसर की स्थिति में उत्कृष्ट सूझबूझ का परिचय देते हुए उन्होंने आतंकियों को फांसने के लिए तुरंत अपना पोजिशन चेंज किया। 16 जून, 2023 की आधी रात के बाद जैसे ही आतंकवादी घात लगाकर बैठे, मेजर की टीम ने उनपर भारी गोली-बारी की और आतंकियों को नीचे धकेल दिया। हालांकि, जवाब में आतंकी कमांडर ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए मेजर पर ग्रेनेड फेंक दिया। मेजर दीपेंद्र और उनकी टीम ने भारी खतरे को भांप लिया।

इस बीच मेजर ने भारी गोलीबार में भी जान की परवाह किए बिना रेंगते हुए आतंकवादी की ओर बढ़े और उसे करीब से मार गिराया। इसके बाद हुई गोलीबारी में उनका सामना दूसरे आतंकवादी से हो गया। मेजर दीपेंद्र ने इस आतंकवादी को भी आमने-सामने की भीषण लड़ाई में उलझाया और अपने खंजर से ही उसे मार डाला। उसके बाद भी मेजर दीपेंद्र ऑपरेशन को नियंत्रित करते रहे और तीसरे आतंकी का सफाया करने में भी अपनी टीम की सहायता की। अधिकारी ने अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी और ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित की। मेजर दीपेंद्र की बहादुरी और उनकी सूझबूझ के कारण ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस सीमा पार के पांच आतंकवादी मार गिराए गए। साइटेशन कहता है, ‘अपने नुकसान की परवाह किए बिना असीम शौर्य का परिचय देते हुए क्लिनिकल ऑपरेशन की योजना बनाने और उसे उत्कृष्ट नेतृत्व से क्रियान्वित करने के लिए मेजर दीपेंद्र विक्रम बस्नेत को ‘कीर्ति चक्र’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।’

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