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सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार, CM चेहरे पर कांग्रेस की ‘गारंटी’ किसके साथ? जानिए ताकत और कमजोरी

कर्नाटक में 10 मई को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत हुई है। 135 सीटों पर बंपर जीत के बाद सभी के मन में सवाल है कि दक्षिण का द्वार कहे जाने वाले राज्य का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? फिलहाल, शीर्ष पद के लिए दौड़ में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और प्रदेश अध्यक्ष डी के शिवकुमार सबसे आगे हैं। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने कभी कर्नाटक का नेतृत्व करने की अपनी महत्वाकांक्षा को छिपाया नहीं है।

सिद्धारमैया की क्या है ताकत?

राज्य भर में व्यापक प्रभाव रखने वाले सिद्धारमैया कांग्रेस विधायकों के एक बड़े वर्ग के बीच लोकप्रिय हैं। उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर 2013-18) के बीच सरकार चलाने का अनुभव प्राप्त है। 13 बजट पेश करने के अनुभव के साथ सक्षम प्रशासन चलाने की क्षमता है। अहिंदा (अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों) के लिए एएचआईएनडीए पर पकड़। कर्नाटक के मुद्दों पर खास जानकारी है। जिसके चलते वे भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) को घेरने की ताकत रखते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि सिद्धारमैया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार का मुकाबला करने की मजबूत क्षमता रखते हैं। राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। जिसके चलते माना जा रहा है कि जाहिर तौर पर उन्हें राहुल का समर्थन प्राप्त है।

सिद्धारमैया की यह है कमजोरी

सिद्धारमैया राजनीतिक तौर पर अगर अनुभवी हैं तो कहीं न कहीं उनकी कुछ कमजोरियां भी हैं। सिद्धारमैया का सांगठनिक रूप में पार्टी के साथ इतना जुड़ाव नहीं है। साल 2018 में कांग्रेस की सरकार की सत्ता में वापसी कराने में विफलता सिद्धारमैया के ऊपर एक धब्बा रहा है। इसके साथ ही अभी भी कांग्रेस के पुराने नेताओं का एक वर्ग उन्हें बाहरी माना जाता है। क्योंकि पहले सिद्धारमैया जद (एस) में थे। इसके साथ ही आयु भी उनकी एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है क्योंकि सिद्धारमैया 75 वर्ष के हैं।

सिद्धारमैया के लिए अवसर और जोखिम

सिद्धारमैया के पास निर्णायक जनादेश के साथ सरकार चलाने के लिए हर किसी को साथ लेकर चलने का मौका है। इसके साथ ही वे 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस को मजबूत करने की अपील को अपने अनुभव से धार दे सकते हैं। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रहे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शिवकुमार के खिलाफ आयकर विभाग (आईटी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामले दर्ज हैं। चुनाव के दौरान सिद्धारमैया ने कहा था कि यह आखिरी चुनाव है। जिसके चलते उनके पास मुख्यमंत्री बनने का आखिरी मौका है।

जोखिम की बात करें तो सिद्धारमैया को मल्लिकार्जुन खरगे, जी परमेश्वर जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को एकजुट करना चुनौती है। जो कि सिद्धारमैया के कारण मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। इसके साथ ही बी के हरिप्रसाद, के एच मुनियप्पा भी उनके विरोधी माने जाते हैं। दलित मुख्यमंत्री की मांग भी सिद्धारमैया की राह का कांटा बन सकती है। शिवकुमार की संगठनात्मक ताकत और पार्टी का संकटमोचक होना सिद्धारमैया के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है। डीके शिवकुमार की वफादारी वाली छवि और गांधी परिवार में खास तौर पर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के साथ करीबी सिद्धारमैया के लिए सिरदर्द बन सकती है।

डीके शिवकुमार की राजनीतिक ताकत

डीके शिवकुमार पार्टी के प्रति वफादारी के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ ही शिवकुमार की मजबूत सांगठनिक क्षमता और चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका रही है। मुश्किल समय में शिवकुमार को कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है। कारोबारी होने के साथ ही संपन्न नेता के तौर पर पहचान रखने वाले शिवकुमार प्रमुख वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। जिसके चलते वोक्कालिगा के प्रभावशाली संतों और नेताओं का समर्थन शिवकुमार के पास है। गांधी परिवार से निकटता होने के साथ ही एज फैक्टर जैसी कोई दिक्कत डीके शिवकुमार के साथ नहीं है। विभिन्न विभागों को संभालने की जिम्मेदारी निभाने वाले शिवकुमार के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है।

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