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खेल तो ‘सोलह’ का है! राज्यपाल आर्लेकर और कांग्रेस अध्यक्ष खरगे तो सिर्फ एक बहाना हैं

आगामी लोक सभा चुनाव में मुद्दे की तलाश में पार्टियां अब काफी आक्रामकता के साथ सक्रिय हो गई हैं। बात जुबान से निकली नहीं या फिर किसी वाक्ये को हुए घंटे या चाहे मिनट भर ही क्यों न हुए हों, उस पर बयानों की बौछार शुरू हो जाती है। फिलहाल दलित मुद्दे को ले कर अपने-अपने उदाहरणों के साथ दोनों गठबंधन दल एक दूसरे पर हमलावर हो चले हैं। फिलहाल भाजपा ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का मामला सर पर उठा रखा है। हो यह रहा है कि राज्य सरकार और राजभवन में टकराव फिर बढ़ रहा है। इसके पहले कुलपति की नियुक्ति के मामले पर बिहार सरकार और राजभवन आमने-सामने हो गए। बीजेपी इस टकराव को राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर के अपमान के रूप में देख रही है।

दलित का अपमान कर रही बिहार सरकार- बीजेपी

भाजपा का आरोप है कि बिहार सरकार एक दलित राज्यपाल को अपमानित करने का काम कर रही है। हालांकि राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने इसी बीच तीखे तेवर दिखाए और कहा कि सभी कुलपतियों को यह निर्देशित किया गया है कि वे राजभवन सचिवालय का ही निर्देश मानें। इस दौरान इशारों इशारों में राज्यपाल ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक को भी खूब सुनाया। हालांकि इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकार और राजभवन के बीच बढ़ती खाई को पाटने का काम करने कोशिश की। वो राजभवन जा कर राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिले। जाहिर है नीतीश कुमार का ये कदम भाजपा के दलित कार्ड को अप्रभावी करने की राजनीति का भी हिस्सा है।

इंडिया गठबंधन ने खरगे का नाम लेकर किया हमला

भाजपा की ओर से दलित कार्ड उछाले जाने के बाद महागठबंधन ने भी भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है। इनका मानना है कि ‘भाजपा ने जान बूझ कर देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राष्ट्रपति के भोज में नहीं बुलाया। भाजपा का दलित प्रेम एक छलावा है।’ भारत की अध्यक्षता में इस बार जी-20 का समारोह राजधानी दिल्ली में 9 सितंबर के बीच होने जा रहा है। जहां इस मीटिंग में भाग लेने के लिए जी-20 के सभी देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष भारत पहुंचे हैं। 9 तारीख की बैठक के बाद डिनर का आयोजन भी किया गया है। कई विपक्षी दल के नेताओं को इस भोज में शामिल किया गया है। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इस डिनर का निमंत्रण नहीं मिला है।

कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया दलित अपमान का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ‘देश की सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को रात्रि भोज का निमंत्रण प्राप्त नहीं होना दलित विरोधी हरकत है। जबकि इस भोज में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी राष्ट्रपति की ओर से डिनर का आमंत्रण मिला है। मल्लिकार्जुन खड़गे को भारत की राष्ट्रपति की ओर से आयोजित किये गए डिनर पर उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है।’ कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को काफी संजीदगी से उठाते कहा है कि ‘यह भाजपा के दलित प्रेम का सच है। भाजपा देश की 60 प्रतिशत जनता को नकारती रही है।’ राहुल गांधी के इस बयान के बाद तो इंडिया गठबंधन के नेताओं के बयानों की बाढ़ सी आ गई।

बात किसी नेता की नहीं, खेल तो ‘सोलह’ का है

आगामी लोकसभा का चुनाव एक तरह से आमने-सामने का होने जा रहा है। और यहीं असल खेल है, खेल तो दरअसल ‘सोलह’ का है। 16 प्रतिशत दलित वोट किसी भी गठबंधन के लिए जीत का कारण बन सकता है। दूसरी तरफ फिलहाल कोई भी एक ऐसा नेता नहीं है जो समग्रता में दलित वोट किसी गठबंधन को ट्रांसफर करा सके। ऐसे में दलित वोट के कई दावेदार नेता हैं। मायावती, चिराग पासवान जैसे और भी कई चेहरे हैं । वैसे में दलित मुद्दा का समवेत स्वर काफी प्रभावित होता है। इसलिए एनडीए की तरफ से राज्यपाल को मुद्दा बनाया तो महागठबंधन ने फौरन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन का मुद्दा उठा कर काउंटर किया। बहरहाल यह सब तो वोट को प्रभावित करने के तरीके है। अब इस युद्ध में कौन कितना प्रभावी होगा यह तो लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे बता ही देंगे।

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