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‘युवाओं को पीएलएफआई का फ्रेंचाइजी देकर वसूली का देता था टारगेट’ अब दिनेश गोप से पूछताछ में खुलेंगे कई राज

प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के सुप्रीमो दिनेश गोप की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता है। दिनेश गोप की गिरफ्तारी में एनआईए की टीम ने बड़ी भूमिका निभाई। प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई कि दिनेश गोप ने अपने प्रभाव क्षेत्र वाले कई जिलों में रंगदारी वसूलने का काम करता था। इस काम के लिए दिनेश गोप ने आपराधिक छवि के युवाओं को पीएलएफआई की फ्रेंचाइजी दी थी। हथियार और संगठन में एरिया कमांडर जैसे पद देकर वह युवाओं को रंगदारी वसूली का टारगेट भी देता था।

लेवी वसूली आय का प्रमुख स्रोत

पीएलएफआई की आय का प्रमुख का स्रोत जबरन लेवी की वसूली करना है। दिनेश गोप कोयला व्यापारियों, रेलवे ठेकेदारों और व्यवसायियों से लेवी वसूलता था। दिनेश ने अपने संगठन विस्तार के लिए विभिन्न आपराधिक संगठनों से गठजोड़ किया था। लेवी (जबरन) वसूली के पैसे से दिनेश गोप हथियारों की खरीदारी करता था। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों में निवेश कर संपत्ति एकत्रित करने में जुटा था।

दिनेश गोप के बाद मार्टिन केरकेट्टा दूसरे नंबर

पुलिस को उम्मीद है कि दिनेश गोप की गिरफ्तारी से संगठन के कई राज खुलेंगे। बताया गया है कि दिनेश गोप की गिरफ्तारी के बाद पीएलएफआई में मार्टिन केरकेट्टा अब सबसे ऊपर आ गया है। झारखंड पुलिस की ओर से पीएलएफआई उग्रवादियों की जो सूची जारी की गई है, उसके अनुसार मार्टिन रीजनल कमेटी का मेंबर है। मार्टिन पर 15 लाख रुपए का इनाम है।

पीएलएफआई के अन्य इनामी नक्सलियों की भी तलाश

मार्टिन गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इसके नीचे संगठन में कुछ प्रमुख उग्रवादी शामिल है। जिनका कार्यक्षेत्र अलग-अलग इलाके में बंटा हुआ है। इसमें गुमला जिला के कामडारा थाना निवासी बलराम लोहरा उर्फ जटु उर्फ मजनू का नाम शामिल है। संगठन में उसका पद एरिया कमांडर का है। उस पर दो लाख का इनाम है। पश्चिमी सिंहभूम के इलाके में सामुएल बुढ़ का नाम शामिल है। वो गुरिल्ला दस्ता का सदस्य है। उस पर एक लाख का इनाम है। चान्हो में कृष्णा यादव पीएलएफआई से जुड़ा है।

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