इंडिया गठबंधन की बात करके क्या विपक्षी दलों ने अपने ही पैर पर मार ली कुल्हाड़ी?
विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A में दरार पड़ गई है। कहा यह भी जा सकता है कि एकजुटता कब थी जो दरार पड़ गई। पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल एक साथ आने की कवायद में जुटते हैं। 23 जून 2023 को विपक्षी दलों की पहली मीटिंग बिहार की राजधानी पटना में हुई। इस मीटिंग में ऐलान हुआ कि जो भी मतभेद हैं वह सब भुलाकर सभी विपक्षी दल मिलकर लोकसभा चुनाव में साथ जाएंगे। हालांकि पहली मीटिंग से लेकर और आज का दिन हर समय सवाल बना रहा कि क्या बात बनेगी। साथ ही अजीब बात है कि जब से यह मुहिम शुरू हुई कोई न कोई नेता हर मीटिंग में नाराज ही रहा। पहली मीटिंग जो पटना में हुई उसमें केजरीवाल, उसके बाद नीतीश और फिर ममता बनर्जी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस जो यह कहती रही कि जो भी मतभेद हैं उसे दूर कर लिया जाएगा। अब उसके सामने भी बड़ा सवाल है।
लोकसभा चुनाव की घोषणा में कुछ ही दिन बचे हैं और माना जा रहा है कि अगले महीने चुनाव आयोग की ओर से इसकी घोषणा कर दी जाएगी। अब ऐसे वक्त में जब ममता बनर्जी कह रही हैं कि अकेले चुनाव लड़ेंगी और पंजाब में भगवंत मान भी वही बात कर रहे हैं। यूपी और दूसरे राज्यों में भी बात पटरी पर आती नहीं दिख रही। ऐसे वक्त में जब गठबंधन टूट जाता है तो यह बात निश्चित तौर पर कही जाएगी कि गठबंधन की बात करके विपक्षी दलों ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। पिछले साल ही मिले और यह साल आते-आते दूर भी होते नजर आ रहे हैं।
ममता बनर्जी की राह पर आगे बढ़ेंगे केजरीवाल
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी टीएमसी भले ही विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में वह राज्य में अकेले चुनाव लड़ेगी। बंगाल में सीटों को लेकर कैसे बात बनेगी इसको लेकर शुरू से सवाल थे। पिछले कुछ दिनों से सीट शेयरिंग के लेकर कांग्रेस और टीएमसी के बीच बात चल रही थी लेकिन जब बात नहीं बनी तो ममता बनर्जी ने एकला चलो रे की घोषणा कर दी है। यह फैसला भले ही एक पार्टी का है लेकिन इसका असर पूरे गठबंधन पर पड़ेगा। जैसे ही यह खबर सामने आई कांग्रेस की ओर से कहा गया कि ममता के बिना गठबंधन की कल्पना नहीं। कांग्रेस अब जो भी कहे लेकिन बात बनती फिलहाल नहीं दिख रही। ममता बनर्जी जैसी बात आम आदमी पार्टी की ओर से भी कही जा रही है।



