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दिल्ली के फाइव स्टार होटलों में क्यों रखे गए हैं हथियार! VVIP सुरक्षा का ‘प्लान-B’ समझिए

दिल्ली में कल यानी 8 सितंबर से जी20 आयोजन शुरू हो जाएगा। हालांकि मुख्य कार्यक्रम 9-10 सितंबर को है लेकिन, राष्ट्राध्यक्षों और बाकी डेलीगेट्स का जुटान शुक्रवार से ही शुरू हो जाएगा। इस बड़े शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नजर रहेगी इसलिए किसी भी अप्रिय घटना के लिए हमारे जवान भी तैयार हैं। दिल्ली के होटलों में हथियारों की खेप तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, इससे कमांडो को ऑपरेशन के दौरान बिना रुके कारतूस और अन्य सामान मिल सकेगा। खुदा न खास्ता अगर ऐसा कुछ भी होता है, तब हमारे जवानों को बुलेट के अलावा लोडेड मैगजीन, मेडिकल सप्लाई, स्टन और स्मोक ग्रेनेड,वायरलेस सेट चार्जर और बैकअप हथियार मिलेंगे।

खूफिया अधिकारी ने बताया कैसी होगी तैयारी
एक खूफिया अधिकारी ने बताया कि मुंबई के 26/11 आतंकवादी हमले में कारतूस की कमी और खराब बारूद प्रमुख मुद्दे थे। 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद दिग्गजों की ओर से दिए गए कई सुझावों को जी20 शिखर सम्मेलन को सुरक्षित करने के लिए शामिल किया गया है। अधिकांश उपाय अचानक या आकस्मात हुए खतरे से बचने के लिए हैं। एक अन्य खुफिया अधिकारी ने बताया कि यह तय किया गया था कि कमांडो को किसी भी हमले से निपटने के लिए पर्याप्त हथियार उपलब्ध कराए जाएं। अगर कोई हमला हुआ तो सप्लाई चेन हथियारों के साथ मुख्य टीम की मदद करने के लिए आगे बढ़ेगी। अचानक हमला होने पर उन्हें और हथियारों के लिए इधर-उधर नहीं भागना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ऑपरेशन बिना किसी समस्या या बाधा के पूरा हो जाए।

प्रगति मैदान होगा नो फ्लाई जोन
हथियारों के अलावा, सुरक्षा एजेंसियों ने सभी होटलों की छतों पर एंटी-ड्रोन तंत्र स्थापित किए हैं ताकि किसी भी मानव रहित हवाई वाहन, यानी ड्रोन को सुविधाओं के आसपास उड़ने से रोका जा सके। प्रगति मैदान और उसके आस-पास के क्षेत्र को एक नो-फ्लाई जोन घोषित किया जाएगा। दिल्ली में कम से कम 16 होटल ऐसे हैं जिसमें प्रमुख हस्तियों, जिनमें राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हैं की मेजबानी करेंगे। सुरक्षा एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। इसमें एडवांस घुसपैठ अलर्ट सिस्टम और Posture Detection Mechanisms का उपयोग और पुलिस उपायुक्त रैंक के अधिकारियों को फील्ड कमांडर के रूप में तैनात करना शामिल है। स्थल कमांडर इंटेलिजेंस ब्यूरो और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग अधिकारियों के समन्वय में विदेशी सुरक्षा टीम के सदस्यों के साथ संपर्क करेंगे।

होटल के कर्मचारियों का होगा पूरा वेरिफिकेशन
होटल के कर्मचारियों का वेरिफिकेशन कई चरणों में किया गया है। प्रत्येक होटल के तल के लिए एक अलग सेट के कर्मचारी होंगे और उनका मूवमेंट हर समय उस तल तक ही सीमित होगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सुरक्षाकर्मियों को केवल ‘नजर से पहचाने जाने वाले’ कर्मचारियों से ही निपटना पड़े। एक अधिकारी ने कहा, ‘एक तल के वर्कर्स को किसी अन्य तल तक पहुंचने की इजाजत नहीं होगी। वे शिखर सम्मेलन के समय एंट्री और एग्जिट के लिए विशेष रूप से प्रोग्राम किए गए की कार्ड का उपयोग करेंगे।’ पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के लिए होटल में लगभग तीन कमरे होंगे। दो कमरों को स्थल कमांडर के नियंत्रण में सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में बदल दिया जाएगा।

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