नई दिल्ली/गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता (Air Quality) में मामूली सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन प्रदूषण के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संकट अभी भी बरकरार है। प्रदूषण के उच्च स्तर का सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यह स्थिति बताती है कि हल्का सुधार भी गंभीर स्वास्थ्य चिंताओं को कम नहीं कर पाया है।
गाजियाबाद के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (Deputy CMO) डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के स्तर के कारण आँखों और श्वसन संबंधी जटिलताओं (Respiratory Complications) की शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों में खांसी, गले में खराश, आँखों में जलन और साँस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएँ आम हैं। विशेष रूप से अस्थमा और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति अधिक खतरनाक बनी हुई है।
डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने, बाहरी गतिविधियों से बचने और आँखों को बार-बार धोने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ठंड बढ़ने और हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएँ और भी गंभीर हो सकती हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू करे ताकि नागरिकों को स्वस्थ हवा मिल सके।



