मैं चप्पल-पजामा पहनकर घर से निकल जाता हूं! बस एक और सुपरहिट फिल्म मिल जाए तो मजा आ जाए: जिम्मी शेरगिल
‘माचिस’, ‘हासिल’, ‘मोहब्बतें’, ‘चरस’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी कई सफल फिल्मों का हिस्सा रहे जिम्मी शेरगिल इन दिनों चर्चा में हैं, इस हफ्ते प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘आजम’ से। अपनी फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में एनबीटी के ऑफिस आए जिम्मी ने हमसे फिल्म, करियर, अपने बेटे, लो प्रोफाइल रहने और बॉक्स ऑफिस जैसे कई मुद्दों पर दिल खोल कर बातें की।
आपकी नई फिल्म ‘आजम’ में ऐसा क्या है? जो आपकी दूसरी फिल्मों से अलग है?
-एक दिलचस्प बात बताऊं, पहले जब ये फिल्म मेरे पास आई थी और मुझे बताया गया कि ये एक रात की कहानी है, तो मैंने फिल्म करने से मना कर दिया था। मगर वो कहते हैं ना कई बार स्क्रिप्ट आर्टिस्ट को चुनती है, तो ये स्क्रिप्ट मेरे पास पड़ी हुई थी। इस बात से अनजान कि ये वही स्क्रिप्ट है, मैंने इसे पढ़ा और मुझे इसमें कमाल का थ्रिल एलिमेंट नजर आया। मैं फिल्म से जुड़ने के लिए इतना ज्यादा उतावला था कि सपोर्टिंग किरदार भी करने को तैयार था, मगर मेरी किस्मत कि ये फिल्म मुझे मिली। अब तक आपने मुझे ज्यादातर पुलिस वाले की भूमिका में देखा है, मगर यहां मैं मुंबई के डॉन के रूप में नजर आऊंगा। इस फिल्म की खूबी यही है कि इसके निर्देशक श्रवण तिवारी ही इसके लेखक और एडिटर भी हैं।
इस फिल्म की पूरी शूटिंग रातों को हुई है, तो रातों को काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?सच कहूं तो मैं अतीत में रात पर आधारित कई डार्क और भूत प्रेत वाली फिल्में कर चुका हूं और इस फिल्म में मुझे लगातार 40 दिनों तक शूट करना था, जो मेरे लिए दुष्कर था, क्योंकि अब मैं रात की शूटिंग वाली फिल्मों से बचता हूं। मेरा पूरा रूटीन डिस्टर्ब हो जाता है, मगर इसकी दमदार स्क्रिप्ट के कारण मैं अपनी रातें कुर्बान करने को तैयार था। हमने मुंबई के टाउन साइड और भायखला जैसे इलाकों में शूटिंग की। उन दिनों मैं एक बहुत स्ट्रिक्ट डायट पर था और नाईट शूटिंग के कारण मेरी हालत खराब थी, मगर मीठा मेरी कमजोरी है और मैं अक्सर रात को जलेबियां या चॉकलेट मंगवा कर खाया करता था।आप पंजाबी फिल्मों के सुपर स्टार हैं और हिंदी फिल्मों में भी एक लंबी पारी खेलते आ रहे हैं, तो दोनों इंडस्ट्री के बीच कैसे बैलेंस करते हैं?
पंजाबी में मैं साल-डेढ़ साल में सिर्फ एक पंजाबी फिल्म करता हूं और एकाध ओटीटी शो, एकाध हिंदी फिल्म। हालांकि मैं चाहता हूं कि साल की दो पंजाबी फिल्में करूं। मगर बस स्क्रिप्ट दमदार होनी चाहिए। हां, ओटीटी में जरूर कुछ अच्छा हो रहा है। नई चीजें आ रही हैं, जो एक्टर-डायरेक्टर-राइटर के लिए बहुत ही कमाल की बात है, तो ओटीटी पर नया जरूर हो रहा है, तो मैनेज हो जाता है।




