दिल्ली एयरपोर्ट पर पहली बार फुल बॉडी स्कैनर, CTX मशीन, कैसे होते हैं ये मेटल डिटेक्टर से अलग, फर्क जानिए
दिल्ली एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी के लिए चेकिंग के दौरान अपने बैग से लैपटॉप और मोबाइल फोन समेत अन्य सामान को निकालने की जरूरत नहीं होगी। नए साल में मई से देश के सभी बड़े एयरपोर्ट पर फुल बॉडी स्कैनर और कंप्यूटेड टोमोग्राफी एक्स-रे (CTX) मशीन लगाने का काम शुरू हो जाएगा। दिल्ली में इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर भी ये मशीनें लगेंगी। हालांकि, विशेष श्रेणी के यात्रियों, जैसे कि व्हीलचेयर का यूज करने वाले या जो शारीरिक रूप से फुल-बॉडी स्कैनर से नहीं गुजर सकते, उनके लिए डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगे रहेंगे। आइए जानते हैं कि आखिर ये स्मार्ट सिक्योरिटी वाली फुल बॉडी स्कैनर मशीन हैं क्या? इसके अलावा सीटीएक्स मशीन कैसे काम करेंगी। ये पारंपरिक डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर से कितनी अलग होंगी।
स्मार्ट सिक्योरिटी फुलबॉडी स्कैनर क्या है?

फुल-बॉडी स्कैनर एक ऐसी मशीन है जो शारीरिक संपर्क बनाए बिना या यात्रियों की प्रिवेसी का उल्लंघन किए बिना वस्तुओं का पता लगाता है। मेटल डिटेक्टरों के विपरीत, फुल-बॉडी स्कैनर नॉन मेटल वस्तुओं का पता लगा सकते हैं, जिन्हें पारंपरिक डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) से पता लगाना मुश्किल है। दिल्ली एयरपोर्ट पर लगाया नया एडवांस स्कैनर एक मिलीमीटर-वेव आधारित स्कैनर है। यह बिल्कुल सटीक काम करता है। इसमें किसी तरह का हेल्थ रिस्क नहीं है। एयरपोर्ट पर यात्रियों को स्कैन करके, कोई भी उनके कपड़ों के नीचे छिपी किसी भी चीज का पता लगा सकता है। यह कर्मियों को असहज स्थिति से बचाता है और सुरक्षा जांच में तेजी लाता है। एयरपोर्ट पर लगाई गई नई मशीन में मिलीमीटर वेव तकनीक का यूज किया गया है। इससे रेडिएशन बहुत कम होगा। बॉडी स्कैनर मशीन में प्रवेश करने पर पैसेंजर को अपना हाथ ऊपर उठाना होगा। इसके बाद महज चंद सेकंड में मशीन बॉडी को स्कैन कर लेगी। इससे शरीर में छुपाए गए विस्फोटक पदार्थ, हथियार, प्लास्टिक, प्रतिबंधित चीजों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। नई स्मार्ट बॉडी स्कैनर मशीन नेकलेस, चूड़ियां, कपड़ों पर मैटेलिक एंब्रायडरी, सेलफोन, वॉलेट आदि चीजों पर ट्रिगर नहीं करेगा।



