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वो दिन लद गए जब बताते थे… अमेरिकी दूत का यह बयान भारत की हैसियत के बारे में सबकुछ कह देता है!

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने बड़ी बात कह दी है। यह अमेरिका के बदलते नजरिये की ओर इशारा करता है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत की दुनिया में क्‍या हैसियत हो गई है। गार्सेटी ने कहा है कि वो दिन बहुत पहले लद गए हैं जब अमेरिका जैसा देश भारत आता था और उसे बताता था कि उन्‍हें क्‍या चाहिए। अमेरिका अब अच्‍छा श्रोता बनाना चाहता है। अमेरिकी राजदूत का यह बयान कई मायनों में बेहद अहम है। खासतौर से तब जब भारत की विदेश नीति में बेहद आक्रामकता आई है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या फिर इजरायल-हमास की जंग, उसने बिना किसी दबाव के अपना रुख पेश किया है। तेजी से बदलती दुनिया में भारत आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने बुधवार को आरके पुरम से ओखला एनएसआईसी मेट्रो स्टेशन तक मजेंटा लाइन में सफर किया। इसका मकसद दिल्ली मेट्रो की एफिशिएंसी का अनुभव करना था। मेट्रो में उनकी यात्रा की तस्‍वीरें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सोशल मीडिया पर शेयर कीं।

गार्सेटी ने बदलते भारत पर दो-टूक शब्‍दों में अपनी राय भी रखी। उन्‍होंने कहा, ‘हम अच्छे श्रोता बनना चाहते हैं। वो दिन बहुत पहले चले गए जब अमेरिका जैसा देश भारत आता था और उसे बताता था कि उसे क्या चाहिए। अगर हम अच्छे श्रोता और अच्छे मित्र हैं, तो भारत हमें बताएगा कि वह महिला सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर जलवायु समाधान और लोगों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने में मदद करने में अग्रणी है। क्‍लाइमेट चेंज हर जगह सबसे गरीब, सबसे कमजोर लोगों को प्रभावित कर रहा है। मैं भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित हूं। प्रौद्योगिकी हमें पहले से ही मजबूत रिश्‍तों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

गार्सेटी ने अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को गुणात्मक बताया। विशेष रूप से टेक्‍नोलॉजी में तेजी से विकास की संभावना पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर शांति, समृद्धि और पर्यावरणीय कल्याण के लिए अपनी साझा महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में दोनों देशों के बीच सहयोग के महत्व को भी दोहराया।

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