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आप शरद नहीं, ललिता पवार… जब लोकसभा में सुषमा स्वराज के भाषण पर लगे ठहाके और जमकर मचा शोर

बात 1996 की है जब 11वीं लोकसभा के नतीजे आए तो किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का न्यौता मिला। अटल बिहारी वाजपेयी ने सरकार बना ली लेकिन बहुमत न होने की वजह से अटल जी को 13 वें दिन ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवेगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने। लोकसभा में 11 जून 1996 को एचडी देवेगौड़ा ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के खिलाफ विपक्ष की ओर से सुषमा स्वराज ने बोलते हुए कांग्रेस समेत कई दलों पर निशाना साधा। सुषमा स्वराज ने शरद पवार पर तंज कसते हुए कहा कि आप शरद नहीं ललिता पवार की भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को लेकर सुषमा स्वराज ने कहा कि मुझे लगा कि आप आपत्ति करेंगे लेकिन आप भी कौरवों की सभा में भीष्म पितामह की तरह मौन साधे रहे। सुषमा स्वराज ने कहा कि इस जनादेश की कैसी व्याख्या की जा रही है।सुषमा स्वराज ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि अध्यक्ष जी जनादेश की जो व्याख्या आप स्वीकार करें लेकिन एक दृश्य सदन में जो उपस्थित हो रहा है उसकी अनदेखी आप नहीं कर सकते। आज से पहले इस सदन में एक दल की सरकार होती थी और विपक्ष बिखरा हुआ विपक्ष होता था। लेकिन आज बिखरी हुई सरकार है और एकजुट विपक्ष है। क्यों यह दृश्य अपने आप में जनादेश की अवहेलना की कहानी नहीं कह रहा। सुषमा स्वराज ने कहा कि यह इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है जब राज्य का सही अधिकारी अपने राज्याधिकार से वंचित कर दिया गया हो। त्रेता में यही घटना राम के साथ बीती थी।राजतिलक करते-करते वनवास दे दिया गया। द्वापर में यहीं घटना युधिष्ठिर के साथ घटी थी जब शकुनी की चालों ने राज्य के अधिकारी को राज्य से बाहर कर दिया। हमारे खिलाफ तो कितने ही शकुनी और मंथराएं हैं। हम राज्य में कैसे बने रह सकते थे। रामराज्य और सुराज की शायद नियति ही यही है कि वह एक बड़े झटके का बाद मिलता है। इसीलिए मैं विश्वास के साथ कहना चाहती हूं कि जिस दिन हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के पद से त्याग पत्र दिया उस दिन राम राज्य की भूमिका तैयार हो गई थी। हिंदुस्तान में उस दिन स्वराज की नींव पड़ गई थी। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का बाना पहनकर हम पर साम्प्रदायिकता का आरोप लगाकर ये तमाम लोग एक साथ हो गए। मेरे नेता ने कहा था कि धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिकता पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए।सुषमा स्वराज ने कहा कि राम विलास पासवान कह रहे, शरद पवार कह रहे हैं कि यह सरकार चलेगी। नरसिम्हा राव जी ने कह दिया है। सुषमा स्वराज ने कहा कि नरसिम्हा राव तो मौन साधे बैठे हैं। भूमिका निभा हे हैं ये। शरद पवार … शरद पवार की भूमिका नहीं ये ललिता पवार की भूमिका निभा रहे हैं। सदन में इसके बाद जमकर ठहाके लगे।

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