अमिताभ बच्चन को बचपन से ही थी एक्टिंग में महारत हासिल, 15 साल की उम्र में निभाया था 45 साल का किरदार

80saalbemisaalbachchan हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा जब उनके बच्चे नैनिताल में पढ़ा करते थे तो वो तीन-तीन महीने में एक बार उनसे मिलने जाया करते थे. वहीं अक्टूबर में जब स्कूल में वार्षिकोत्सव होता था तो वे उसमें वो शामिल होते थे. इस दौरान उनके स्कूल में कई कार्यक्रम होते थे.
80saalbemisaalbachchan महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) 11 अक्टूबर को अपना 80वां जन्मदिन मना रहे हैं. उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से प्रशंसकों का दिल जीता है और वो सदी के महानायक हैं. वो लगातार फिल्मों में एक सक्रिय हैं और उनकी पिछली फिल्म ब्रह्मास्त्र थी. उन्होंने फिल्म सात हिंदुस्तानी से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. हालांकि उन्होंने एक वॉयस नरेटर के तौर पर नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म भुवन शोम से की थी. उन्हें बचपन से ही एक्टिंग में महारत हासिल है. इसका जिक्र उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा में है.
15 साल की उम्र में 45 साल का किरदार निभाना था
हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा जब उनके बच्चे नैनिताल में पढ़ा करते थे तो वो तीन-तीन महीने में एक बार उनसे मिलने जाया करते थे. वहीं अक्टूबर में जब स्कूल में वार्षिकोत्सव होता था तो वे उसमें वो शामिल होते थे. इस दौरान उनके स्कूल में कई कार्यक्रम होते थे. अपनी किताब में उन्होंने अमिताभ बच्चन के एक नाटक मंचन का जिक्र किया है. जिसमें वह लिखते हैं कि, हम सभी बहुत उत्साहित थे क्योंकि स्कूल में गोगोल का नाटक ‘इंस्पेक्टर जनरल’ का मंचन होना था और अमित को मेयर का पार्ट दिया गया था. उसे 15 साल की उम्र में 45 साल का किरदार निभाना था.
तेजी और मैं थोड़ा नर्वस थे
उन्होंने लिखा है, हम दोनों ही अपने बेटे का अभिनय देखने के लिए उत्सुक थे. हम कॉलेज के रंगभवन में बैठे थे. अमित ने मेयर की वेशभूषा में मंच पर प्रवेश किया. तेजी का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और वो थोड़ा नर्वस भी थीं और उन्होंने मेरा हाथ जोर से पकड़ लिया था. मैं भी नर्वस था कि पता नहीं अमित अपना अभिनय ठीक से कर पायेगा या नहीं. लेकिन अमित जिस तरह से अपने पात्र में डूबकर किरदार को निभा रहा था हमारी नर्वसता ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी. नाटक खत्म होने के बाद निर्णायकों ने उसे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार ‘केंडल कप’ दिया गया.
बस यह एक शुरुआत थी
उन्होंने अपनी खुशी को बयां करते हुए लिखा, हम अपनी खुशी क्या बताएं, ऐसा लगा था जैसे हमें ही पुरस्कार मिल गया हो. उस समय शायद ही यह किसी ने समझा होगा कि एक दिन यह लड़का फिल्म-संसार में एक सर्वप्रिय अभिनेता कहा जायेगा और बस यह एक शुरुआत थी.
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