संसद की कार्यवाही पांचवें दिन भी ठप, विपक्ष ने अडाणी और मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई
सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच लगातार पांचवें दिन स्थगित कर दी गई। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दल अडाणी मामले, मणिपुर हिंसा और संभल की घटना पर चर्चा की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष संविधान के 75वें वर्ष पर बहस सहित कई मुद्दों पर चर्चा चाहता है। उन्होंने सरकार से सदन चलाने के लिए सहयोग करने की अपील की।
कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए तैयार है, बशर्ते सरकार विपक्ष की मांगों पर सहमति जताए। उन्होंने स्पीकर से कार्रवाई करने की मांग की।
टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल की है। उन्होंने बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि और उर्वरक जैसे मुद्दों को उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विपक्षी दलों ने अडाणी मुद्दे पर चर्चा के लिए कार्य सलाहकार समिति में स्थान देने की मांग की। टीएमसी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को संसद चलाने में रुचि नहीं है।
शीतकालीन सत्र का पहला दिन 25 नवंबर को शुरू हुआ, लेकिन हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के कारण कार्यवाही बाधित रही। सत्र 20 दिसंबर तक चलने वाला है, लेकिन अब तक कोई महत्वपूर्ण चर्चा नहीं हो पाई है।
संसद के दोनों सदनों में लगातार नारेबाजी जारी है। विपक्ष ने मांग की है कि अडाणी मामले, मणिपुर और संभल हिंसा की स्थिति पर चर्चा कराई जाए।
इस बीच, सरकार की ओर से इन मुद्दों पर कोई ठोस जवाब नहीं मिलने के कारण कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
सांसदों और जनता के लिए संसद का ठप रहना चिंता का विषय बनता जा रहा है।


