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पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ये दो नेता कौन ? जिन्हें राजस्थान की सभा में मिली खास तवज्जो

किसी भी राजनैतिक पार्टी के हाईकमान का जब राज्यों में दौरा होता है तब प्रदेश के नेताओं में होड़ रहती है कि वे हाईकमान की अगुवाई में आगे रहे। जैसे तैसे हाईकमान के साथ नज़र आएं ताकि उनकी राजनैतिक हैसियत बढ़े, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। पार्टी हाईकमान का स्वागत कौन करेगा, उनके साथ कौन चलेगा और किसे तवज्जो मिलेगी। यह सब प्रदेश नेतृत्व के बजाय ऊपर से तय होता है। पीएम मोदी के दौरे के दौरान जयपुर एयरपोर्ट पर प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित चुनिंदा नेता मौजूद रहे लेकिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक पर पुष्पांजलि के दौरान सिर्फ दो नेता पीएम के साथ रहे। इनमें एक थे नारायण पंचारिया और दूसरे थे ओंकार सिंह लखावत।

कौन हैं ओंकार सिंह लखावत ?

ओंकार सिंह लखावत नागौर जिले के रहने वाले हैं। कॉलेज के दिनों से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जुड़े। बाद में वर्ष 1980 में जब भाजपा के गठन के दौरान दिल्ली में हुए सम्मेलन में ओंकार सिंह लखावत मौजूद थे। भाजपा में आने के बाद वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वर्ष 1997 से 2000 तक वे राज्यसभा सांसद रहे। पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे के शासन के दौरान लखावत को उन्हें राजस्थान विरासत संरक्षण एवं संवर्धन प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। पीएम मोदी जब पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने गए थे तब लखावत उनके साथ रह। लखावत ने ही स्मारक और पैनोरमा से जुड़ी जानकारियां पीएम मोदी को दी।

बीजेपी की इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी के संयोजक हैं पंचारिया

नारायण पंचारिया जोधपुर जिले में स्थित फलोदी के रहने वाले हैं। वे ओंकार सिंह लखावत की तरह पंचारिया भी स्कूली दिनों से ही संघ से जुड़ गए थे। स्नातक के बाद वे राजनीति में सक्रिय हो गए। पार्टी में विभिन्न पदों पर रहते हुए वे राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। हाल ही में बीजेपी हाईकमान ने पंचारिया को चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया है। विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी ने उन्हें बड़ी भूमिका दी है। टिकटों के वितरण में पंचारिया की भूमिका खास रहेगी। हाल ही में बीजेपी की ओर से प्रदेश की सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में परिवर्तन संकल्प यात्रा निकाली गई। इस यात्रा का संयोजक भी पंचारिया को बनाया गया था। रिपोर्ट- रामस्वरूप लामरोड़

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