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चमत्कार को नमस्कार! 8 घंटे तक बैग में बंद रहा नवजात, श्मशान में कैसे हुआ जिंदा?

असम के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में बुधवार को एक महिला की डिलिवरी हुई। डिलिवरी से पहले महिला की हालत बेहद नाजुक थी। डॉक्टरों ने महिला के पति को बताया कि डिलिवरी के दौरान बच्चे या उसकी मां, किसी एक को ही बचाया जा सकता है। बाद में डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की मौत हो गई है। नवजात की बॉडी को एक थैले में बंद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया। हॉस्पिटल की ओर से बच्चे के पिता को डेथ सर्टिफिकेट भी दिया गया। नवजात के घरवाले करीब 8 घंटे बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले गए। श्मशान में जब परिजनों ने बैग खोला तो बच्चा रोने लगा। फिर सभी बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा है।

बैग खोलते ही रोने लगा नवजात
सिलचर के एक अधिकारी ने मृत घोषित किए गए नवजात के श्मशान में जीवित होने की पुष्टि की है। नवजात के पिता रत्न दास ने बताया कि वह अपनी पत्नी को मंगलवार शाम को लेबर पेन होने के बाद एक प्राइवेट अस्पताल ले गया था। डॉक्टरों ने बताया कि डिलिवरी में प्रॉब्लम है। ऐसी हालत में वे मां या फिर बच्चे में से किसी एक को ही बचा सकते हैं। रत्न दास ने तत्कालीन परिस्थितियों में डिलिवरी करने की अनुमति दे दी। थोड़ी देर बाद डॉक्टरों ने उसे बताया कि उसकी पत्नी ने एक मरे हुए बच्चे को जन्म दिया है। रत्न दास ने बताया कि बुधवार सुबह हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने डेथ सर्टिफिकेट के साथ बच्चे को एक थैले में बंदकर सौंप दिया। करीब आठ घंटे बाद घरवाले नवजात की बॉडी लेकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान पहुंचे। जब उन्होंने थैला खोला तो बच्चे ने रोना शुरू कर दिया। इसके बाद वह नवजात को लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचे।

डॉक्टर की सफाई, चेक के बाद डेड बताया
पीड़ित परिवार ने हॉस्पिटल और डॉक्टर के खिलाफ पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि हॉस्पिटल में काफी देर तक बच्चे को बिना जांच-पड़ताल के थैले में बंद रखा गया। इसके विरोध में परिजनों ने सिलचर के मैनाबिल इलाके में हॉस्पिटल के सामने बुधवार को प्रदर्शन भी किया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने नवजात को मृत घोषित करने से पहले आठ घंटे तक निगरानी में रखा था। डॉक्टरों ने कई बार बच्चे की जांच की। बच्चा कोई हरकत नहीं कर रहा था। इसके बाद ही बच्चे को मृत घोषित कर परिजनों को सौंप दिया गया। हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने सफाई दी है कि बच्चे की जांच में लापरवाही नहीं की गई थी। इसमें डॉक्टरों की कोई गलत मंशा नहीं थी।

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