तेलंगाना और मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा, देश में अब तक क्या है व्यवस्था?
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के बाद अब तेलंगाना का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। आगामी 30 नवंबर को 119 सीटों के लिए मतदान होगा। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे बीजेपी, कांग्रेस और बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) ने अपना प्रचार तेज कर दिया है।सबका टारगेट ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना है। जीतने की चाह में राजनीतिक दल जमकर एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं। चुनावी हलचल के बीच तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा जोर पकड़ते जा रहा है। तेलंगाना का चुनाव मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रित होता जा रहा है। बीजेपी नेता और गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान साफ कह चुके हैं कि अगर बीजेपी तेलंगाना की सत्ता में आती है तो मुस्लिम समुदाय के 4 प्रतिशत आरक्षण को खत्म कर देगी और इसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच वितरित करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘तेलंगाना देश भर में एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मुसलमानों को धार्मिक आरक्षण देने का काम हुआ है। बीजेपी ने तय किया है कि हम तेलंगाना में गैर संवैधानिक आरक्षण को समाप्त करके ओबीसी आरक्षण बढ़ाएंगे और एससी-एसटी का भी न्यायिक आरक्षण होगा।’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मुस्लिम आरक्षण’ पर अपना रुख साफ कर दिया है। सीएम योगी ने कुमुरम भीम आसिफाबाद की रैली में कहा कि मुस्लिम आरक्षण संविधान विरोधी है। किसी भी स्थिति में इसे लागू नहीं होने देना चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आरोप लगाया कि तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण डॉ. बीआर अंबेडकर की ओर से बनाए गए संविधान का अपमान है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को आरक्षण असंवैधानिक है। इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाना चाहिए।



