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नीतीश कुमार…लीडर ऑफ ऑल सीजंस, सियासत में ‘बारहमासी जीव’ बनकर रहने का खेल समझिए

रिकॉर्ड 9वीं बार सीएम बनने के लिए नीतीश ने महागठबंधन को छोड़कर एनडीए में शामिल होने का कदम उठाया है। यह एक दशक से अधिक समय में चौथी बार है, जब उन्होंने पाला बदल लिया है। बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने एक बार फिर पद संभाल रहे हैं। रविवार सुबह इस्तीफा दे दिया। इस बार वे लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के समर्थन से बिहार की एनडीए सरकार के मुखिया होंगे। नीतीश कुमार 72 साल की उम्र में, रिकॉर्ड नौवीं बार मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं। वे एक अनुभवी समाजवादी नेता हैं। 1974-75 के जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने एक लंबा राजनीतिक सफर तय किया है। नीतीश कुमार ने शुरुआती दिनों में लालू यादव और उसके बाद जॉर्ज फर्नांडीस की क्षत्रछाया में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उसे एक लंबा मुकाम दिया।

9वीं पर सीएम पद की शपथ

समता पार्टी की स्थापना 1994 में हुई। बिहार की राजनीतिक धरा पर समता पार्टी को वैसी सफलता नहीं मिली। 1995 में समता पार्टी के हिस्से महज 7 सीटें रही। नीतीश ने ये महसूस किया कि बिहार की सियासत में जातिगत समीकरण की लड़ाई उन्हें बहुत आगे बढ़ने नहीं देगी। 1996 में नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन थाम लिया। नीतीश के नाम पर बीजेपी के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी तैयार हो गए। बीजेपी के शीर्ष नेताओं को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो जाति से ऊपर उठा हो। लम्बा राजनीतिक अनुभव रखता हो। उसके बाद वर्ष 2000 में एनडीए के हिस्से के रूप में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि वो सरकार मात्र 7 दिनों तक चली।

लीडर ऑफ ऑल सीजंस

बीजेपी का साथ मिलने के बाद से नीतीश कुमार हमेशा चतुराई के साथ अपने पत्ते खोलते रहे। नीतीश कुमार की जाति की उपस्थिति राज्य में महज 3 फीसदी है। उन्होंने हमेशा चालाकी से मजबूत सामाजिक आधार वाले साझेदारों को चुना है। नीतीश को लीडर ऑफ ऑल सीजंस इसलिए भी हैं कि नीतीश ने जून 2013 से जुलाई 2017 चार साल तक और अगस्त 2022 से 27 जनवरी 2024 डेढ़ साल तक सिर्फ आरजेडी के साथ गठबंधन किया। मुस्लिम-यादव यानी लगभग 30 फीसदी वोटों के एक मजबूत आधार के बावजूद भी आरजेडी को नीतीश कुमार को सीएम के चेहरे के रूप में स्वीकार करना पड़ा। वैसे नीतीश कुमार के लिए पाला बदलना कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक अस्तित्व के खेल के माहिर खिलाड़ी का नाम नीतीश कुमार है।

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