केजरीवाल की गारंटियों पर विपक्षी गठबंधन के कई साथी साथ, लेकिन कांग्रेस ही चुप! आखिर माजरा क्या है?
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP )के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को ‘केजरीवाल की गारंटी’ की घोषणा की। केजरीवाल ने केंद्र में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनने पर फ्री बिजली, अग्निवीर योजना को समाप्त करने, भारतीय जमीन को चीनी कब्जे से मुक्त कराने समेत 10 कार्य गिनाए और कहा कि इन्हें युद्धस्तर पर किया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि लोगों को ‘मोदी की गारंटी’ और ‘केजरीवाल की गारंटी’ के बीच चुनाव करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केजरीवाल की गारंटी एक ब्रांड है। अपनी गारंटी की घोषणा पर केजरीवाल ने कहा कि मैंने इसके बारे में अपने गठबंधन के साथियों से चर्चा नहीं की है लेकिन मैं इन गारंटी को पूरा करने के लिए अपने ‘इंडिया’ गठबंधन के साथियों पर दबाव डालूंगा। केजरीवाल की इस गारंटी पर इंडिया गठबंधन में शामिल कई दलों से समर्थन मिला लेकिन कांग्रेस ने इस पर सतर्क रुख अपनाया।
केजरीवाल की 10 गारंटियों पर कांग्रेस ने कोई टिप्पणी करने से परहेज किया वहीं शिवसेना, डीएमके, टीएमसी और जेएमएम जैसे सहयोगियों से समर्थन मिला। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि AAP की गारंटी कांग्रेस के न्याय पत्र की तरह उसके घोषणापत्र के समान है। उन्होंने साझा एजेंडे पर पहुंचने की प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिस पर राष्ट्रीय नेतृत्व आगे फैसला लेगा। सीपीएम केरल सचिव एमवी गोविंदन ने बीजेपी को हराने पर गठबंधन के फोकस पर जोर दिया और लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद तक साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर आगे की चर्चा को टाल दिया।
डीएमके ने प्रत्येक पार्टी के घोषणापत्र में अलग-अलग प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि केजरीवाल द्वारा की गई अधिकांश गारंटी जैसे बिजली और स्वास्थ्य राज्य के विषय हैं। उन्हें केवल राज्य ही लागू कर सकते हैं। बीजेपी सरकार के विपरीत, यदि भविष्य की सरकारों द्वारा राज्यों के लिए जीएसटी मुआवजा बढ़ाया जाता है, तो राज्य अपने स्वयं के कल्याणकारी उपायों को लागू कर सकते हैं। सीपीआई महासचिव डी राजा ने AAP की गारंटियों को उनके घोषणापत्र के रूप में देखा। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास भी अपना घोषणापत्र है, जिसमें हम आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर कई मुद्दों पर बात करते हैं… हमारे जीतने और सरकार बनाने के बाद सभी इंडिया गठबंधन के सदस्य एक साथ आएंगे और एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करेंगे।



