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इस तस्वीर के आगे आजादी बेमानी है! 75 साल बाद भी हाल बेहाल, नाव से नदी पार स्कूल जाने को मजबूर बच्चे

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में नदी पर पुल या रपटा न बनने से तमाम गांवों के बच्चों को स्कूल आने और जाने के लिए नाव से नदी आरपार होना पड़ता है। नाव में क्षमता से अधिक बच्चों को नदी पार कराए जाने से उनके परिजन बच्चों के वापस लौटने तक चिंता में रहते है। आजादी के 75 साल बाद भी नदी किनारे बसे आधा दर्जन गांवों की दशा भी बदरंग है।

हमीरपुर जिले के मौदहा क्षेत्र के बीहड़ में बसे बैजेमऊ, किसवाही, परेहटा और गढ़ा समेत आधा दर्जन गांव की करीब पन्द्रह हजार आबादी है जो चन्द्रावल नदी के अंतिम छोर पर बसे है। आजादी के 75 साल बाद भी इस नदी में न तो पुल बना और नहीं एक रपटा बन सका।

नदी किनारे बसे इन गांवों के हजारों बच्चों को स्कूल आने और जाने के लिए नाव से नदी आरपार होना पड़ता है। बारिश के मौसम में इस नदी का जलस्तर बढऩे से गांव टापू जैसे नजर आ रहे है। गांवों में नमामि गंगे परियोजना के तहत अन्डरग्राउन्ड पाइपलाइन डाले जाने के कारण गली कूचे दलदल हो गए है।

गांव के हर रास्ते में बारिश के सीजन में कीचड़ भरा है जिससे लोगों का घर से निकलना भी दूभर है। शिवसेना के प्रदेश उपप्रमुख महंत रतन ब्रम्हचारी ने बताया कि किसवाही, परेहटा, गढ़ा और बैजेमऊ समेत तमाम गांवों की हजारों आबादी आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी विकास के नाम पर छली गई है। इन गांवों के बाशिन्दों को नदी पार करने के लिए आज भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बताया कि पिछले कुछ दशक से चन्द्रावल नदी में एक पुल और रपटा की मांग को लेकर गांव के लोगों ने कई दिनों तक सामूहिक रूप से धरना प्रदर्शन किया।

लेकिन आज तक इस समस्या से निजात गांवों के लोगों को नहीं मिल सकी। मौदहा क्षेत्र के एसडीएम राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि किसवाही, परेहटा व गढ़ा समेत अन्य गांवों के लोग सुमेरपुर क्षेत्र के मुंडेरा आने जाने के लिए नाव से नदी पार करते होंगे। ऐसे में स्कूली बच्चों को नाव से नदी पार कराए जाने पर इसे दिखवाया जाएगा। बताया कि मुंडेरा-किसवाही के बीच नदी में कोई पुल रपटा नही है।

नदी किनारे बसे आधा दर्जन गांवों की आज भी नहीं बदली तस्वीर
चन्द्रावल नदी किनारे बसे आधा दर्जन गांवों की आजादी के 75 साल बाद भी तस्वीर नहीं बदल सकी। ग्रामीणों ने बताया कि मासूम बच्चों को नदी पार दूसरे गांव के स्कूल में पढऩे जाना पड़ता है। नदी किनारे बसे गांवों की दशा में बड़ी ही दयनीय है। नदी का जलस्तर बढऩे के कारण आसपास के तमाम गांव टापू बन जाते है।

नदी के कारण लोग अपने गांव से बाहर नहीं जा पाते है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई सालों से नदी में पुल और रपटा के निर्माण कराए जाने के लिए प्रदर्शन किया गया। जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन तक कई बार सामूहिक रूप से लेटर दिया गया लेकिन आज तक समस्या से निजात नहीं मिल सकी।

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