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‘जगहंसाई’ के दौर से गुजर रहा नीतीश-लालू की पार्टी के नेताओं का रिश्ता, महागठबंधन में ‘दरार’ की स्क्रिप्ट तैयार

बिहार की सियासत में बड़ा सस्पेंस है। नेता आपस में लड़ रहे। परस्पर विरोधी नेता हों तो लड़ाई-झगड़े की बात समझ में आती है, लेकिन जब एक ही दल के नेता आपस में लड़ने लगे तो यह बात कैसे किसी के गले उतरेगी। बिहार में हाल के दिनों में कई ऐसी बातें या घटनाएं हुई हैं, जिसे दलीय निष्ठा से जुड़े नेता-कार्यकर्ता और समर्थक समझ नहीं पा रहे। राजद और जेडीयू दोनों एक दूसरे के साथ सरकार में हैं। कई बार ये बात निकल कर सामने आई है कि दोनों दल मिल गए, लेकिन पार्टी के नेताओं के दिल नहीं मिले। मुजफ्फरपुर के कुढ़नी उपचुनाव में इस बात को देखा गया। जब आरजेडी और जेडीयू का वोट एक दूसरे में ट्रांसफर नहीं हुआ। नीतीश कुमार ने उस हार के बाद पार्टी में समीक्षा करने की बात भी कही। अब एक बार नेताओं के आपसी रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

नीतीश के सामने ललन सिंह-अशोक चौधरी भिड़े

जेडीयू कार्यालय में अपने नेता नीतीश कुमार के सामने ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह लड़ गए थे। संयोगवश नीतीश भी वहां मौजूद थे। नीतीश के सामने संकट यह कि वे किसका पक्ष लें। इसलिए चुपचाप वहां से खिसक जाना ही उन्होंने बेहतर समझा। दोनों नेता के भिड़ने का कोई बड़ा कारण नहीं था। बरबीघा से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले अशोक चौधरी पहली बार कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। बरबीघा उनके पिता का कार्य क्षेत्र भी रहा है। स्वाभाविक है कि अशोक चौधरी के संबंध उस इलाके के लोगों से रहे होंगे। अक्सर वे वहां की यात्रा भी करते हैं। कांग्रेस के अपने पुराने साथियों से मिलते हैं। ललन सिंह इसे दूसरे के क्षेत्र में अशोक चौधरी की दखलंदाजी मानते हैं। संभव है कि ललन सिंह के पास राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते वहां से इस तरह की कोई सूचना आई हो। लेकिन जिस तरह नीतीश के सामने दोनों भिड़े, वह आम लोगों के बीच तो संशय पैदा करता ही है।

‘ठाकुर’ के सवाल पर अब आरजेडी में हुआ बवाल

आरजेडी अघोषित तौर पर सुप्रीमो वाली पार्टी है। पदधारी कोई रहे, चलती लालू यादव के परिवार की ही है। लालू या तेजस्वी यादव ही आरजेडी के नीतिगत या अन्य किसी मामले में फैसला लेते हैं। अमूमन ऐसी पार्टियों के नेता अपना मुंह बंद ही रखना चाहते हैं। आपस में भिड़ने से भी बचते हैं। पर, अब ऐसा नहीं रहा। आरजेडी के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने प्रसंगवश ‘ठाकुर’ को लेकर एक कविता पढ़ी। इसे ठाकुरों (राजपूतों) ने अपना अपमान तो माना ही, बाहुबली सांसद आनंद मोहन के बेटे और आरजेडी के विधायक चेतन आनंद हत्थे से उखड़ गए हैं। उन्होंने कविता को ठाकुरों के लिए अपमानजनक बताया है। उन्होंने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

अब RJD में मनोज झा और चेतन आनंद भिड़े हैं

आरजेडी विधायक चेतन आनंद ने सोशल मीडिया पर लिखा है- ‘हम “ठाकुर” हैं साहब !! सबको साथ लेकर चलते हैं ! इतिहास में सबसे अधिक बलिदान हमारा है ! समाजवाद में किसी एक जाति को टारगेट करना समाजवाद के नाम पर दोगलापन के अलावा कुछ नहीं ! जब हम दूसरों क बारे में गलत नहीं सुन सकते तो अपने (ठाकुरों) पर अभद्र टिप्पणी बिल्कुल नहीं बर्दाश्त करेंगे ! ! सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बिना नाम लिए मनोज झा के खिलाफ उन्होंने यह टिप्पणी लिखी है। हालांकि अंत में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे मनोज झा को ही अपनी बात सुना रहे हैं। हैश टैग के साथ लिखा है- #माननीय सांसद श्री मनोज झा के विचारों का पुरजोर विरोध ! यानी जेडीयू के बाद अब आरजेडी नेताओं में भी रगरा शुरू हो गया है।

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