भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कम्बोज ने इस प्रस्ताव के पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 21 दिसंबर शीतकालीन संक्रांति का दिन है, जो भारतीय परंपरा में ‘उत्तरायण’ की शुरुआत का प्रतीक है, जो आंतरिक चिंतन के लिए एक शुभ समय है।
यह प्रस्ताव मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने में ध्यान के महत्व को मान्यता देता है। यह सदस्य देशों को व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण में सुधार के लिए ध्यान और माइंडफुलनेस के अभ्यास को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और ध्यान के वैश्विक महत्व की मान्यता है।
मुख्य बिंदु:
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस घोषित किया।
भारत ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया।
21 दिसंबर शीतकालीन संक्रांति का दिन है।
यह प्रस्ताव मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए है।



