हाल ही में लंदन हाई कोर्ट ने एक सुनवाई में बताया कि उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया फिलहाल पूरी नहीं होगी और वे 2026 के अंत तक हिरासत में रह सकते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- नीरव मोदी पर भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।
- यूके कोर्ट ने बताया कि वह “गोपनीय” कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
- यह प्रक्रिया 2026 के अंत तक चल सकती है, प्रत्यर्पण पर कोई त्वरित फैसला नहीं।
- उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 8 मिलियन डॉलर के कर्ज की वसूली रोकने की मांग की।
- नीरव मोदी ने कहा कि जेल में होने के कारण उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं मिल रहा।
- उन्होंने जेल में इंटरनेट की कमी को भी न्याय प्रक्रिया में बाधा बताया।
- न्यायाधीश डेविड बेली ने नीरव मोदी की इस दलील को खारिज कर दिया।
- सुनवाई के दौरान नीरव मोदी वीडियो कॉल के जरिए पेश हुए।
- उन्होंने खुद को “Litigant in Person” कहकर अपना बचाव किया।
- नीरव मोदी ने कोर्ट में खुद को कमजोर बताते हुए बैंक ऑफ इंडिया की तुलना “टैंकों और मशीनगनों” से की।
- जज ने कहा कि समान प्रक्रिया का मतलब संसाधनों की समानता नहीं होती।
- नीरव मोदी को प्रत्यर्पण से बचने के लिए ब्रिटेन में शरण मांगने की अटकलें।
- कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर कोई त्वरित निर्णय नहीं होगा।
- नीरव मोदी को “Nirav” ब्रांड के लक्जरी ज्वेलरी बिजनेस के लिए जाना जाता है।
- भारत में पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में उनकी संलिप्तता पाई गई थी।
- वह 2018 में भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग गए थे।
- ब्रिटिश अदालत ने 2021 में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।
- अब उनकी कानूनी लड़ाई लंबी खिंचने की संभावना।
- भारत सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटी हुई है।
- अगली सुनवाई में प्रत्यर्पण को लेकर कुछ और स्पष्टता आ सकती है।



