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धनबाद में दवा कंपनी के अधिकारी ने की आत्महत्या: पारिवारिक विवाद बना कारण.

धनबाद के बरटांड़ पंडित क्लीनिक रोड स्थित एक फ्लैट में दवा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

मृतक की पहचान 57 वर्षीय राजीव सिंह के रूप में हुई है, जो एक प्रतिष्ठित दवा कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि राजीव सिंह पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे, जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।

घटना का विवरण

घटना सोमवार की सुबह की है। राजीव सिंह के घर का दरवाजा सुबह से बंद था। परिवार के सदस्यों ने जब कई बार दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद परिवार ने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा। अंदर का नजारा देखकर परिवार के होश उड़ गए। राजीव सिंह का शव पंखे से लटका हुआ मिला। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पारिवारिक विवाद के कारण तनाव में थे अधिकारी

परिवार के सदस्यों के अनुसार, राजीव सिंह का अपनी पत्नी के साथ पिछले कुछ समय से मनमुटाव चल रहा था। इस कारण वे मानसिक रूप से काफी परेशान थे। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले ही उनकी पत्नी उनसे अलग रहने लगी थी। इस घटना के बाद राजीव सिंह अपनी मां के साथ रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि राजीव सिंह इस स्थिति को लेकर बेहद तनाव में थे और इससे उबर नहीं पा रहे थे।

कोई सुसाइड नोट नहीं मिला

पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, राजीव सिंह का मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान को पुलिस ने जब्त कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है।

कर्मचारियों और परिचितों में शोक

राजीव सिंह की मौत से उनके सहकर्मी और परिचित सदमे में हैं। दवा कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राजीव सिंह एक कुशल और अनुभवी अधिकारी थे। वे अपने काम के प्रति समर्पित थे और सहकर्मियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनकी मौत से कंपनी को गहरा आघात लगा है।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की गंभीरता को उजागर किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे लोगों को परामर्श और भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है। झारखंड सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आश्वासन दिया है।

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