यह महत्त्वपूर्ण राजमार्ग लगातार भूस्खलन के कारण बंद हो रहा है, जिससे कश्मीर घाटी का संपर्क शेष भारत से कट जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से किए गए राजमार्ग के “गलत” पुनर्संरेखण (realignment) ने इस मार्ग को भारी बारिश से होने वाले भूस्खलन के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। उनके अनुसार, जिस तरह से पहाड़ों को काटा गया और नए रास्ते बनाए गए, वह तकनीकी रूप से कमजोर साबित हुआ है। भूवैज्ञानिकों ने निर्माण से पहले ही इन क्षेत्रों में भूस्खलन के जोखिम की चेतावनी दी थी।
इन अवरोधों से केवल यातायात ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रशासन को अब इंजीनियरिंग की खामियों को दूर करने और राजमार्ग को सभी मौसमों के लिए सुरक्षित बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।


